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धर्मेंद्र प्रधान की जगह संभाल सकती हैं निर्मला सीतारमण? मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की अटकलें, यूपी-पंजाब पर रहेगा खास फोकस

मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हैं। धर्मेंद्र प्रधान, निर्मला सीतारमण और शक्तिकांत दास को लेकर नई चर्चाएं हैं। जानिए संभावित नए मंत्रियों, पोर्टफोलियो बदलाव और यूपी-पंजाब चुनावों से जुड़े राजनीतिक समीकरण।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 28 Jun 2026 8:59:51

धर्मेंद्र प्रधान की जगह संभाल सकती हैं निर्मला सीतारमण? मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की अटकलें, यूपी-पंजाब पर रहेगा खास फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर सियासी हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार कैबिनेट में व्यापक बदलाव कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं, जबकि कुछ चेहरों को मंत्रिमंडल से बाहर भी किया जा सकता है। जिन मंत्रियों के कामकाज या विभाग हाल के दिनों में विवादों के केंद्र में रहे हैं, उनके मंत्रालयों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।

चर्चाओं के मुताबिक, पूर्व आईएएस अधिकारी और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वहीं मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय का दायित्व दिए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। गौरतलब है कि NEET पेपर लीक प्रकरण के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विपक्ष और कई छात्र संगठनों के निशाने पर रहे हैं। उनके इस्तीफे की मांग भी लगातार उठती रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार कैबिनेट विस्तार और फेरबदल के जरिए कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देने की तैयारी कर सकती है।

संभावित नए चेहरे जिन्हें मिल सकती है कैबिनेट में जगह

1- नीतीश कुमार

2- शक्तिकांत दास

3- सुखेंदु शेखर राय

4- तरुण चुग

5- राघव चड्ढा

6- श्रीकांत शिंदे

7- अनुराग ठाकुर

जिन मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं या हो सकती है विदाई

1- मनोहर लाल खट्टर

2- रवनीत सिंह बिट्टू

3- अश्विनी वैष्णव

4- धर्मेंद्र प्रधान

5- निर्मला सीतारमण

6- हरदीप सिंह पुरी

7- नितिन गडकरी

क्या शक्तिकांत दास को मिलेगा वित्त मंत्रालय?

69 वर्षीय शक्तिकांत दास प्रशासनिक और आर्थिक मामलों का लंबा अनुभव रखते हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी होने के साथ-साथ उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि उन्हें वित्त मंत्री बनाया जाता है तो वे उन चुनिंदा व्यक्तित्वों की सूची में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने आरबीआई और वित्त मंत्रालय दोनों में शीर्ष जिम्मेदारियां निभाई हों।

इस सूची में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री सी.डी. देशमुख का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। सी.डी. देशमुख भारतीय रिजर्व बैंक के पहले भारतीय गवर्नर थे और उन्होंने 1950 से 1956 तक देश के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया था। वहीं डॉ. मनमोहन सिंह 1982 से 1985 तक आरबीआई गवर्नर रहे, उसके बाद 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री बने और आगे चलकर 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वह अब तक ऐसे एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने आरबीआई गवर्नर, वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री—तीनों पदों की जिम्मेदारी निभाई।

फिलहाल शक्तिकांत दास संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। हालांकि संवैधानिक व्यवस्था के तहत मंत्री बनने के बाद उन्हें छह महीने के भीतर संसद का सदस्य बनना होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा जा सकता है, जहां नवंबर 2026 में राज्यसभा की 10 सीटें रिक्त होने वाली हैं।

वित्त मंत्री पद के लिए क्यों मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं?

शक्तिकांत दास को आर्थिक और वित्तीय नीतियों का गहरा जानकार माना जाता है। टैक्स नीति, निवेश, सरकारी वित्तीय प्रबंधन और व्यापक आर्थिक मामलों में उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाता है। वित्त मंत्रालय में कार्यकाल के दौरान वह आठ केंद्रीय बजट तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा रह चुके हैं।

इसके अलावा 2018 से 2024 तक आरबीआई गवर्नर के रूप में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण आर्थिक परिस्थितियों का सामना किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनके कार्यकाल को वैश्विक संस्थानों से सराहना मिली और उन्हें A+ रेटिंग सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए।

यूपी और पंजाब के चुनावी समीकरणों पर भी रहेगी नजर

कैबिनेट विस्तार में केवल प्रशासनिक प्रदर्शन ही नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को भी अहम आधार माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों को विशेष महत्व दिए जाने की चर्चा है। NEET विवाद के कारण धर्मेंद्र प्रधान लगातार दबाव में हैं, ऐसे में उनके मंत्रालय में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

उधर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की भूमिका को लेकर भी अटकलें हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए सरकार वहां से किसी नए सिख चेहरे को आगे ला सकती है। इस संदर्भ में राघव चड्ढा का नाम भी चर्चाओं में बना हुआ है।

फिलहाल पंजाब से रवनीत सिंह बिट्टू केंद्र सरकार में मंत्री हैं। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे नीतीश कुमार को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। महाराष्ट्र से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र और सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम भी संभावित नए चेहरों में गिना जा रहा है। माना जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों को एनडीए के साथ लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई का रुख करने वाले सुखेंदु शेखर राय को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की चर्चाएं हैं।

धर्मेंद्र प्रधान और निर्मला सीतारमण पर टिकी रहेंगी निगाहें

इस संभावित कैबिनेट फेरबदल में सबसे अधिक नजरें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर रहेंगी। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जरूर है कि निर्मला सीतारमण को मंत्रिमंडल से हटाने के बजाय उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। दूसरी ओर धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही।

कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि शिक्षा मंत्रालय धर्मेंद्र प्रधान से वापस लिया जाता है तो विपक्ष इसे सरकार के दबाव में झुकने के रूप में पेश कर सकता है। वहीं यह भी संभावना जताई जा रही है कि नौकरशाही से राजनीति में आए कुछ मंत्रियों की भूमिका सीमित की जा सकती है। इनमें अश्विनी वैष्णव और हरदीप सिंह पुरी के नाम प्रमुख रूप से लिए जा रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्राथमिकताओं को भी महत्व मिल सकता है। हाल ही में बीजेपी और आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच हुई बैठकों को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए रवनीत सिंह बिट्टू को पंजाब में संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावनाएं भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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