आंवले का अचार भारतीय खाने की थाली में खास जगह रखता है। दाल-चावल हो या गरमा-गरम पराठे, इसका खट्टा और तीखा स्वाद भोजन का जायका बढ़ा देता है। घर पर इसे बनाना ज्यादा मुश्किल नहीं है, लेकिन लंबे समय तक अच्छा बनाए रखने के लिए आंवले की सही पहचान, मसालों का संतुलन और तेल का इस्तेमाल समझना जरूरी है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे बनाने के तरीके भी अलग हैं। उत्तर भारत में जहां सरसों के तेल का इस्तेमाल आम है, वहीं दक्षिण भारतीय शैली में तिल के तेल से अचार तैयार किया जाता है। अचार बनाने के लिए सबसे पहले अच्छे आंवले चुनें। इसके बाद उन्हें सही तरीके से साफ करके सुखाना और मसालों के साथ मिलाना जरूरी है। जार में भरते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि थोड़ी-सी नमी अचार को खराब कर सकती है।
अचार बनाने के लिए कैसे चुनें सही आंवले
अच्छे आंवले का चुनाव अचार के स्वाद और गुणवत्ता पर असर डालता है। इसके लिए ताजा, सख्त और हरे या हल्के हरे रंग के फल लें। आंवले पर नरम हिस्से, झुर्रियां या दाग नहीं होने चाहिए। बहुत बड़े आंवले कभी-कभी अधिक रेशेदार हो सकते हैं, जबकि बहुत छोटे फलों में गूदा कम मिलता है। नवंबर से फरवरी के बीच बाजार में आंवले आसानी से मिल जाते हैं। इस मौसम में अचार बनाने के लिए ताजे फल चुनना सुविधाजनक रहता है। इस्तेमाल से पहले आंवलों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद उन्हें कपड़े पर फैलाकर पूरी तरह सुखाना जरूरी है। फल के ऊपर पानी की बूंदें या नमी रह जाने से अचार में फफूंद लगने और उसके खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।
अचार के लिए आंवले तैयार करने का सही तरीका
आंवलों को अचार में किस रूप में इस्तेमाल करना है, यह आपकी पसंद और रेसिपी पर निर्भर करता है। अगर आप उन्हें साबुत रखना चाहते हैं, तो कांटे या टूथपिक की मदद से हर आंवले में छोटे-छोटे छेद कर दें। इन छेदों से मसाले फल के अंदर तक पहुंचने में मदद मिलती है। कुछ लोग आंवलों को चार हिस्सों में काटकर अचार बनाते हैं। वहीं जल्दी तैयार होने वाले अचार के लिए इन्हें छोटे टुकड़ों या पतली स्लाइस में भी काटा जा सकता है। कई पारंपरिक तरीकों में आंवलों को मसाले मिलाने से पहले भाप में पकाया जाता है। इसके लिए इन्हें प्रेशर कुकर में रखकर एक-दो सीटी तक भी पकाया जा सकता है। इससे फल थोड़े नरम हो जाते हैं और मसालों का स्वाद बेहतर तरीके से सोख पाते हैं। हालांकि, पकाते समय ध्यान रखें कि आंवले बहुत ज्यादा नरम न पड़ें, वरना अचार में उनका आकार और बनावट बिगड़ सकती है।
आंवले के अचार में कौन-कौन से मसाले डालें
अचार का असली स्वाद उसमें इस्तेमाल होने वाले मसालों से आता है। इसके लिए मेथी दाना, सौंफ, सरसों के बीज, कलौंजी, हल्दी, हींग और लाल मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है। मेथी दाना अचार को खास स्वाद देता है, जबकि सौंफ की हल्की मिठास आंवले के खट्टेपन को संतुलित करती है। सरसों के बीज और कलौंजी से अचार में तीखापन और अलग तरह की खुशबू आती है। हल्दी, हींग और लाल मिर्च भी इसके स्वाद को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। तेल का चुनाव भी अचार के स्वाद में फर्क पैदा करता है। उत्तर भारतीय तरीके से बनने वाले आंवले के अचार में सरसों का तेल अधिक इस्तेमाल किया जाता है। दूसरी ओर, दक्षिण भारतीय शैली में तिल का तेल आम है। सरसों के तेल को इस्तेमाल करने से पहले गर्म करके ठंडा करना जरूरी है।
उत्तर भारतीय तरीके से घर पर बनाएं आंवले का अचार
500 ग्राम आंवले का अचार बनाने के लिए निम्न सामग्री की जरूरत होगी:
- सरसों का तेल: करीब डेढ़ कप
- सौंफ: 2 बड़े चम्मच
- मेथी दाना: 1 बड़ा चम्मच
- कलौंजी: 1 बड़ा चम्मच
- हल्दी: 1 बड़ा चम्मच
- लाल मिर्च: 2 बड़े चम्मच
- हींग: 1 छोटा चम्मच
- नमक: स्वादानुसार
बनाने की विधि:
सबसे पहले आंवलों को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें। अब कांटे की मदद से उनमें छोटे-छोटे छेद कर दें। इसके बाद इन्हें भाप में पकाएं या प्रेशर कुकर में एक-दो सीटी आने तक रखें। जब आंवले हल्के नरम हो जाएं, तो उन्हें बाहर निकालकर ठंडा होने दें।
अब एक कड़ाही में सरसों का तेल डालकर गर्म करें। तेल को तब तक गर्म करना है, जब तक उसमें से धुआं निकलने न लगे। इसके बाद गैस बंद कर दें और तेल को पूरी तरह ठंडा होने दें।
दूसरी तरफ सौंफ और मेथी दाने को हल्का भून लें। इन्हें ज्यादा देर तक न भूनें, खासकर मेथी को, क्योंकि अधिक भुनने पर उसका स्वाद कड़वा हो सकता है। मसाले ठंडे होने के बाद इन्हें दरदरा पीस लें।
अब एक साफ और सूखे बर्तन में पके हुए आंवले डालें। इनमें पिसी हुई सौंफ और मेथी मिलाएं। इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च, कलौंजी, हींग और नमक डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें। आखिर में ठंडा किया हुआ सरसों का तेल डालें और फिर से अच्छी तरह मिलाएं, ताकि मसाले और तेल आंवलों पर समान रूप से लग जाएं।
तैयार मिश्रण को साफ और पूरी तरह सूखे कांच के जार में भर दें। ध्यान रखें कि आंवले तेल में पूरी तरह डूबे रहें। अगर जार में तेल कम दिखाई दे, तो जरूरत के अनुसार थोड़ा और तेल डाल सकते हैं। जार को कुछ दिनों के लिए धूप में भी रखा जा सकता है। इस तरीके से तैयार उत्तर भारतीय शैली का आंवले का अचार लगभग दो सप्ताह में खाने के लिए तैयार हो जाता है।
मीठा-खट्टा स्वाद पसंद है तो बनाएं गुड़ वाला आंवले का अचार
अगर आपको तीखे अचार के बजाय मीठा और खट्टा स्वाद पसंद है, तो गुड़ की मदद से आंवले का मीठा अचार भी बनाया जा सकता है। इसके लिए 500 ग्राम आंवले लें। साथ में एक कप सरसों या तिल का तेल, एक कप कद्दूकस किया हुआ गुड़, 2 बड़े चम्मच दरदरी पिसी सरसों, एक बड़ा चम्मच मेथी, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और हींग की जरूरत होगी।
इसे बनाने के लिए सबसे पहले आंवलों को काट लें। अब एक बर्तन में तेल गर्म करके उसमें आंवले और बताए गए मसाले डालें। इन्हें अच्छी तरह मिलाते हुए पकाएं। जब आंवले मसालों के साथ पक जाएं, तब इसमें कद्दूकस किया हुआ गुड़ डाल दें।
अब मिश्रण को धीमी आंच पर पकाते रहें, जब तक गुड़ पूरी तरह पिघल न जाए और अचार थोड़ा गाढ़ा न होने लगे। इसके बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को ठंडा होने दें। ठंडा होने पर इसे साफ और सूखे कांच के जार में भरकर रख दें। कुछ दिनों बाद इसका स्वाद और बेहतर हो जाता है।
आंवले के अचार को खराब होने से बचाने के लिए अपनाएं ये तरीके
अचार को लंबे समय तक ठीक रखने के लिए सिर्फ सही मसाले और तेल ही काफी नहीं हैं। इसे बनाने और स्टोर करने के दौरान सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है। आंवले, मसाले, इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन और कांच का जार पूरी तरह सूखे होने चाहिए। इनमें जरा-सी भी नमी रह जाने पर अचार में फफूंद लग सकती है।
अचार निकालने के लिए हमेशा साफ और सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें। गीले चम्मच से अचार निकालने पर उसमें नमी पहुंच सकती है। साथ ही, जार में आंवले तेल के अंदर पूरी तरह डूबे रहने चाहिए। अगर तेल कम हो जाए और कुछ हिस्से बाहर दिखाई देने लगें, तो जरूरत के अनुसार तेल बढ़ाया जा सकता है।
अचार के जार को ठंडी और सूखी जगह पर रखना बेहतर रहता है। जार खोलने के बाद इसे फ्रिज में भी रखा जा सकता है। समय-समय पर अचार की स्थिति पर ध्यान दें। अगर उसमें फफूंद दिखाई दे, असामान्य बदबू आने लगे, आंवले बहुत ज्यादा चिपचिपे या खराब नजर आएं अथवा अचार में असामान्य बुलबुले बनने लगें, तो उसे खाना ठीक नहीं है।
आंवले का अचार स्वाद में अच्छा होता है, लेकिन इसे बनाते समय तेल और नमक का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसे रोजाना बहुत अधिक मात्रा में खाने के बजाय सीमित मात्रा में ही खाना बेहतर है।













