गोकर्ण के इन प्राचीन मंदिरों का अपना ही हैं अलग धार्मिक महत्व, दर्शन करने से मिलेगी मन को शांति

By: Pinki Fri, 13 May 2022 4:18 PM

गोकर्ण के इन प्राचीन मंदिरों का अपना ही हैं अलग धार्मिक महत्व, दर्शन करने से मिलेगी मन को शांति

गोकर्ण कर्नाटक में एक हिंदू तीर्थ शहर है और समुद्र तट प्रेमियों के लिए भी ये एक खास जगह मानी जाती है। गोकर्ण एक धार्मिक एवं पवित्र क्षेत्र है। यह गंगावली तथा अग्निशिनी के बीच में पड़ता है।गोकर्ण की प्रतिष्ठा यहां के मंदिरों की वजह से ऊपर उठी है। लोककथाओं से पता चलता है कि गोकर्ण भगवान शिव और विष्णु का शहर है। यहाँ महादेव का वास है। यहां भगवान शिव के चमत्कारों की अनेक कथाएं प्रचलित है। माना जाता है, की यहां पर देवता भी महादेव का पूजन करने आते है। इस स्थान के लिए मान्यता है, की यहाँ पर को लोग 3 दिन तक उपवास करके भगवान शिव कि पूजा करते ही उसे 10 अश्वमेघ यज्ञ के जितना पुण्य मिल जाता है। भगवान शिव गाय के कान से प्रकट हुए थे, इसीलिए इसका नाम गोकर्ण पड़ा। इससे जुडी एक अतिप्रचलित कथा है। रावण को आत्मालिंगम लेने और लंका को शक्तिशाली बनाने से रोकने के लिए, उसे गोकर्ण में दोखा दिया गया था। चलिए आपको गोकर्ण में मौजूद मंदिरों के बारे में बताते हैं -

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महाबलेश्वर मंदिर

महाबलेश्वर में भगवान शिव का 6 फिट लंबा शिवलिंग है। ये आत्मलिंग के रूप में प्रचलित है। यह मंदिर सफल ग्रेनाइट के उपयोग से बनाया गया है। भगवान शिव की 1500 साल पुरानी मूर्ति इसमें स्थापित की गई है। मंदिर का उल्लेख महाभारत और रामायण के हिंदू पौराणिक कथाओं में किया गया है और इसे काशी जितना ही महत्वपूर्ण कहा जाता है, इसलिए इसे दक्षिण काशी की उपाधि मिली हुई है। मान्यता है की मंदिर में आने से पहले कारवार बीच में डुबकी लगाते सबसे पहले महागणपति जी के मंदिर जाना चाहिए और फिर महाबलेश्वर मंदिर में प्रवेश करना चाहिए। यहां आप जींस, ट्रॉउज़र या शॉट्स नहीं पहनकर जा सकते हैं। मंदिर के खुले रहने का समय सुबह 6 बजे से 12 बजे के बीच है, तो वही शाम 5 बजे से रात 8 बजे के बीच है।

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महा गणपति मंदिर

भगवान गणेश को समर्पित, यह मंदिर महाबलेश्वर मंदिर के पास स्थित है और गोकर्ण जाने वाले तीर्थयात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय है। भगवान शिव के आशीर्वाद की कथा के अनुसार, तीर्थयात्रियों को महाबलेश्वर मंदिर जाने से पहले भगवान गणेश का आशीर्वाद लेना चाहिए। इस मंदिर में दर्शन करने का समय सुबह 6 बजे से 12:30 दोपहर तक है, तो वही दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे के बीच है।

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भद्रकाली मंदिर

भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु ने तीनों लोक पर विजय प्राप्त करने वाले अत्यंत शक्तिमान राक्षस वैत्रासुर को हराने के लिए दुर्गा नामक महिला योद्धा की रचना की थी। गोकर्ण शहर की रक्षा के लिए उसे विभिन्न देवताओं द्वारा उपहार में दिए गए आशीर्वाद और शक्तियों के साथ भद्रकाली के रूप में फिर से नामित किया गया था। ये मंदिर श्री शंकर नारायण मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है, जहां तीर्थयात्री रोजाना यहां दर्शन करने के लिए आते हैं। सुबह 5 बजे से 12 बजे के बीच और शाम 4 बजे रात 8 बजे के बीच इस मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं।

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महालसा सिद्धिविनायक मंदिर

इस मंदिर को 150 साल पहले श्री सिद्धिविनायक की मूर्ति के साथ बनाया गया था। ये मंदिर श्री महालसा सिद्धिविनायक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और यह मुख्य बस स्टेशन से 10 किलोमीटर दूर स्थित है। यह एक सुंदर मंदिर है जिसे गोकर्ण में आपकी अवश्य देखना चाहिए। यहां कई त्यौहार मनाए जाते हैं, जिसे देखने के लिए हजारों की भीड़ जुटती है। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय गणेश चतुर्थी और श्रवण संकष्टी के त्योहारों के दौरान होता है। यहां सुबह 6 बजे से रात 9 बजे के बीच दर्शन किए जाते हैं।

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सोमेश्वर मंदिर

गोकर्ण में यह एक शिव मंदिर है। इसे 14 शताब्दी में स्थित किया गया था। यह मंदिर चोलो द्वारा स्थापित किया गया था और चालुक्य राजा ओ ने इसे विस्तार में बढ़ाया था। इसकी रचना विशाल स्तंभों वाली इमारत के साथ की हुई है और इसमें गर्भगृह और कल्याण मंडप भी बनाया गया है। उसमे नक्षी काम भिंकिया गया है इसीलिए इसे राष्ट्रीय खजाने के रूप में ASI के द्वारा प्रचलित किया है। यह काफी हद तक बैंगलोर के सोमेश्वर मंदिरों से मिलता जुलता है। एक विशाल संरचना और स्तंभों वाली इमारत के साथ, इसके अंदर 'गर्भगृह' और 'कल्याण मंडप' है, और साथ ही यहां हाथी, शहर आदि की भी नक्काशी की गई है। यहां सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच और शाम 5:30 बजे से 9 बजे के बीच दर्शन कर सकते हैं।

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श्री उमा महेश्वर मंदिर

श्री उमा महेश्वर मंदिर शतश्रृंग पर्वत की चोटी पर स्थित है और दोनों ओर से गोकर्ण में कुडले समुद्र तट और ओम समुद्र तटों द्वारा संरक्षित है। यह गोकर्ण के पास लोकप्रिय आकर्षणों में से एक है और यह भगवान शिव और उनकी पत्नी देवी पार्वती को समर्पित है। मंदिर तक पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका पहाड़ की चोटी पर 15 मिनट की पैदल यात्रा या गोकर्ण शहर से ट्रैकिंग करना है। मंदिर हिंद महासागर का एक आश्चर्यजनक दृश्य प्रस्तुत करता है जो गोकर्ण मंदिरों के मुख्य आकर्षण में से एक है।

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मल्लिकार्जुन मंदिर

गोकर्ण में श्री वेंकटरमण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। अलंकृत स्तंभ तीर्थयात्रियों को इस पवित्र गर्भगृह में ले जाते हैं, जहां कोई भी भगवान विष्णु की पूजा कर सकता है। गैर-मूल निवासी मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं, लेकिन मंदिर के बाहर से होने वाले समारोहों को देख सकते हैं। यह गोकर्ण के सबसे भव्य मंदिरों में से एक है जिसकी इतनी सुंदर और मजबूत संरचना है। यह गोकर्ण में घूमने के लिए लोकप्रिय स्थानों में से एक है। सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच इस मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

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