हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के साथ जीवनशैली में बदलाव भी अहम भूमिका निभाते हैं। शीतली प्राणायाम सांस लेने का एक ऐसा योग अभ्यास है, जिसके संभावित प्रभावों पर कुछ वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों में इसके अभ्यास के बाद रक्तचाप और हृदय गति में कमी देखी गई है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि हर व्यक्ति का बीपी केवल पांच मिनट में सामान्य हो जाएगा या यह बढ़े हुए रक्तचाप को तुरंत नियंत्रित करने का भरोसेमंद तरीका है। योग विशेषज्ञ और पोषण विशेषज्ञ जूही कपूर ने भी सोशल मीडिया पर शीतली प्राणायाम का उल्लेख करते हुए इसे हाई बीपी के प्रबंधन में सहायक अभ्यास बताया है। लेकिन इस दावे को समझने के लिए वैज्ञानिक अध्ययनों के नतीजों और आपात स्थिति में जरूरी चिकित्सकीय मदद के बीच अंतर जानना जरूरी है।
क्या है शीतली प्राणायाम?
शीतली प्राणायाम में जीभ को बाहर निकालकर उसके दोनों किनारों को मोड़ने की कोशिश की जाती है, ताकि वह नली जैसा आकार बना सके। इसके बाद मुंह से धीरे-धीरे सांस अंदर ली जाती है और मुंह बंद करके नाक से सांस बाहर छोड़ी जाती है। इस अभ्यास में सांस को सहज रखना जरूरी है। जबरदस्ती बहुत गहरी सांस लेने या सांस रोकने की जरूरत नहीं होती। यहां यह भी ध्यान रखना चाहिए कि शीतली प्राणायाम के अलग-अलग तरीकों में अंतर हो सकता है। कुछ शोधों में सांस रोकने की प्रक्रिया भी शामिल थी, जबकि अन्य में ऐसा नहीं किया गया था। इसलिए किसी एक अध्ययन के नतीजे को सभी तरीकों पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
शीतली प्राणायाम पर वैज्ञानिक अध्ययन क्या बताते हैं?
इस विषय पर 2026 में Indian Heart Journal में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में प्राणायाम से जुड़े सात यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों के कुल 683 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्राणायाम के बाद हृदय गति में कमी के प्रमाण मिले। सिस्टोलिक रक्तचाप में भी कमी का संकेत था, लेकिन नतीजे इस्तेमाल किए गए सांख्यिकीय मॉडल के अनुसार अलग थे। डायस्टोलिक रक्तचाप से जुड़े सुधार सीमित रहे। शोधकर्ताओं ने बड़े और बेहतर तरीके से तैयार अध्ययनों की जरूरत भी बताई। शीतली प्राणायाम पर 2021 में प्रकाशित एक अध्ययन में 60 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया था। इनमें से 30 लोगों ने पांच मिनट तक शीतली प्राणायाम किया, जबकि बाकी प्रतिभागियों ने सामान्य गति से सांस ली। अध्ययन में प्राणायाम करने वाले समूह में हृदय गति और रक्तचाप के कई मापों में कमी दर्ज की गई। लेकिन प्रतिभागी स्वस्थ थे, इसलिए इन नतीजों को सीधे हाई बीपी के मरीजों पर लागू नहीं किया जा सकता। हाई बीपी के मरीजों पर हुए एक अन्य छोटे अध्ययन में 24 लोगों को शामिल किया गया था। इसमें शीतली प्राणायाम के साथ सांस रोकने की प्रक्रिया का अभ्यास 10 मिनट तक कराया गया। नतीजों में सिस्टोलिक रक्तचाप में कमी का संकेत मिला। हालांकि, प्रतिभागियों की संख्या कम होने के कारण इस अध्ययन के आधार पर सभी मरीजों के लिए समान असर का दावा नहीं किया जा सकता।
इन शोधों से प्राणायाम को रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायक अभ्यास के रूप में देखने का आधार मिलता है, लेकिन यह प्रमाणित नहीं होता कि केवल पांच मिनट का शीतली प्राणायाम हर व्यक्ति का बढ़ा हुआ बीपी तुरंत कम कर देगा।
शीतली प्राणायाम करने का तरीका
अगर आप इस अभ्यास को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहते हैं, तो इसे सहज तरीके से किया जा सकता है।
1. आराम से बैठें: ऐसी जगह बैठें, जहां आप सहज महसूस करें। पीठ सीधी रखें और कंधों को ढीला छोड़ दें।
2. जीभ को नली जैसा आकार दें: जीभ बाहर निकालें और उसके किनारों को धीरे से मोड़ने की कोशिश करें। अगर ऐसा करना संभव न हो, तो जीभ को जबरदस्ती न मोड़ें।
3. मुंह से सांस अंदर लें: जीभ से बने आकार के रास्ते धीरे-धीरे सांस अंदर खींचें। बहुत गहरी सांस लेने का दबाव न डालें।
4. नाक से सांस छोड़ें: मुंह बंद करके नाक से धीरे-धीरे सांस बाहर निकालें। सामान्य अभ्यास में सांस रोकने की जरूरत नहीं है।
5. सहज गति से दोहराएं: कुछ चक्र आराम से करें। चक्कर, घबराहट या असहजता महसूस होने पर अभ्यास रोक दें।
यह तरीका शीतली प्राणायाम के सामान्य अभ्यास को समझने के लिए है। इसे हाई बीपी के अचानक बढ़ने पर आपातकालीन उपचार के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
बीपी बढ़ने पर किन बातों का ध्यान रखें?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, यदि रक्तचाप 180/120 mm Hg से अधिक हो, तो कम से कम एक मिनट रुककर दोबारा जांच करनी चाहिए। यदि रीडिंग फिर भी इतनी ही अधिक है, तो तुरंत स्वास्थ्य पेशेवर से संपर्क करना जरूरी है। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, कमजोरी, सुन्नपन, नजर में बदलाव या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षण भी हों, तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। ऐसी स्थिति में प्राणायाम करके यह देखने का इंतजार न करें कि बीपी अपने आप कम होता है या नहीं। हाई बीपी की दवाएं अपने आप बंद न करें और न ही उनकी खुराक बदलें। शीतली प्राणायाम को डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि उनकी सलाह के अनुसार सहायक अभ्यास के रूप में ही अपनाएं।













