पानी पीने के बाद पेशाब आना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन अगर आपको थोड़ी-थोड़ी देर में टॉयलेट जाना पड़ता है या रात में बार-बार नींद खुलती है, तो इसकी वजह पर ध्यान देना जरूरी है। कई बार अधिक मात्रा में पानी पीने, चाय या कॉफी का सेवन करने से पेशाब ज्यादा आ सकती है। हालांकि, कुछ स्थितियों में यह परेशानी बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल, यूरिन इन्फेक्शन या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है।
बार-बार पेशाब आने का कारण समझने के लिए डॉक्टर आपके लक्षणों और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। हर व्यक्ति को सभी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। सही जांच का चुनाव परेशानी के साथ मौजूद दूसरे लक्षणों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
1. ब्लड शुगर की जांच से चल सकता है डायबिटीज का पता
अगर आपको बार-बार पेशाब आने के साथ बहुत ज्यादा प्यास लगती है, तो डॉक्टर ब्लड शुगर की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने पर पेशाब की मात्रा और बार-बार पेशाब जाने की जरूरत बढ़ सकती है। ऐसे में डायबिटीज की संभावना को समझने के लिए खून की जांच मददगार होती है। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार फास्टिंग ब्लड शुगर या HbA1c टेस्ट लिख सकते हैं। फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट में खाली पेट खून में ग्लूकोज का स्तर जांचा जाता है। वहीं, HbA1c जांच से पिछले लगभग दो से तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल की जानकारी मिलती है।
इन जांचों के नतीजों से डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि कहीं बार-बार पेशाब आने की परेशानी का संबंध डायबिटीज से तो नहीं है। केवल बार-बार पेशाब आने के आधार पर डायबिटीज मान लेना सही नहीं है, इसलिए जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
2. यूरिन टेस्ट से पता चल सकता है इन्फेक्शन का कारण
बार-बार पेशाब आने के साथ पेशाब करते समय जलन, दर्द या असामान्य बदबू महसूस हो, तो यूरिन इन्फेक्शन यानी मूत्र मार्ग में संक्रमण की संभावना हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर पेशाब की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए आमतौर पर यूरिन रूटीन टेस्ट किया जाता है। इस जांच से पेशाब में मौजूद कुछ ऐसे संकेतों का पता लगाने में मदद मिलती है, जो संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर यूरिन कल्चर टेस्ट भी लिख सकते हैं। इससे संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया की पहचान करने और उचित इलाज चुनने में मदद मिलती है।
अगर आपको ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक दवाएं न लें। गलत दवा या अनावश्यक एंटीबायोटिक का इस्तेमाल इलाज को मुश्किल बना सकता है। जांच के नतीजों और लक्षणों के आधार पर डॉक्टर आगे का उपचार तय कर सकते हैं।
3. पेशाब की धार कमजोर हो तो करानी पड़ सकती है यूरोफ्लोमेट्री जांच
अगर पेशाब करते समय धार कमजोर रहती है, पेशाब शुरू करने में परेशानी होती है या टॉयलेट जाने के बाद भी ऐसा लगता है कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ, तो इसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर कुछ अतिरिक्त जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। ऐसे मामलों में यूरोफ्लोमेट्री टेस्ट किया जा सकता है। इस जांच में पेशाब के प्रवाह यानी उसके निकलने की गति और मात्रा को मापा जाता है। इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि पेशाब का प्रवाह सामान्य है या उसमें कोई रुकावट हो सकती है।
कुछ स्थितियों में अल्ट्रासाउंड जांच भी कराई जाती है। इसके जरिए पेशाब करने के बाद ब्लैडर में बची हुई पेशाब की मात्रा का आकलन किया जा सकता है। इन जांचों की जरूरत हर उस व्यक्ति को नहीं होती जिसे बार-बार पेशाब आती है। डॉक्टर लक्षणों और शुरुआती जांच के आधार पर तय करते हैं कि आगे किस टेस्ट की जरूरत है।
4. पैरों या चेहरे पर सूजन हो तो डॉक्टर किडनी की जांच करा सकते हैं
बार-बार पेशाब आने के साथ अगर पैरों या चेहरे पर सूजन जैसी परेशानी भी दिखाई दे, तो डॉक्टर किडनी के कामकाज की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके कामकाज में गड़बड़ी होने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए डॉक्टर किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) कराने को कह सकते हैं। इन जांचों से यह समझने में मदद मिलती है कि किडनी ठीक तरह से काम कर रही है या नहीं। जरूरत के अनुसार डॉक्टर दूसरी जांचें भी लिख सकते हैं।
ध्यान रखें कि बार-बार पेशाब आने का मतलब यह नहीं है कि आपकी किडनी खराब हो रही है। इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसलिए खुद से किसी बीमारी का अनुमान लगाने या रिपोर्ट के बिना इलाज शुरू करने के बजाय पहले डॉक्टर से परामर्श लें। जांच के नतीजों और आपकी स्थिति के आधार पर ही उपचार तय किया जाना चाहिए।
5. डॉक्टर को अपनी परेशानी की पूरी जानकारी दें
बार-बार पेशाब आने की सही वजह पता लगाने में आपके लक्षणों और रोजमर्रा की आदतों की जानकारी भी अहम होती है। डॉक्टर को बताएं कि आपको दिन में कितनी बार पेशाब आती है, रात में कितनी बार नींद खुलती है और आप दिनभर में कितना पानी पीते हैं। चाय-कॉफी के सेवन के बारे में भी जानकारी दें, क्योंकि इन आदतों का पेशाब की आवृत्ति पर असर पड़ सकता है। आप चाहें तो कुछ दिनों तक एक रिकॉर्ड बना सकते हैं। इसमें पानी और दूसरे पेय पदार्थ पीने का समय, पेशाब जाने की आवृत्ति और रात में उठने की संख्या लिखें। इससे डॉक्टर को आपकी परेशानी का पैटर्न समझने और जरूरत के अनुसार जांच चुनने में आसानी हो सकती है।
अगर पेशाब में खून दिखाई दे, तेज बुखार हो, पेट या कमर में तेज दर्द हो अथवा पेशाब बिल्कुल न हो रही हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।














