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रोज़ाना एक पैग शराब भी बढ़ा सकता है मुंह के कैंसर का जोखिम, समय रहते पहचानें शुरुआती संकेत

रोज़ाना एक पैग शराब भी मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। रिसर्च, कारण और ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण जानें, ताकि समय रहते बचाव किया जा सके।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 02 Feb 2026 7:21:21

रोज़ाना एक पैग शराब भी बढ़ा सकता है मुंह के कैंसर का जोखिम, समय रहते पहचानें शुरुआती संकेत

पिछले कुछ वर्षों में शराब का सेवन तेजी से बढ़ा है। आज बड़ी संख्या में लोग खुद को “सोशल ड्रिंकर” या “ओकेज़नल ड्रिंकर” मानते हैं और यह सोचते हैं कि सीमित मात्रा में शराब पीना सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं है। लेकिन नई रिसर्च और डॉक्टरों की चेतावनी कुछ और ही कहानी बयां करती है। हैरानी की बात यह है कि रोज़ सिर्फ एक पैग शराब लेने वालों में भी कैंसर, खासकर मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अब तक मुंह के कैंसर को मुख्य रूप से धूम्रपान या तंबाकू चबाने से जोड़ा जाता था, लेकिन यह खतरा सिर्फ इन्हीं आदतों तक सीमित नहीं है।

कई लोग यह मान लेते हैं कि अगर वे सिगरेट, गुटखा या पान नहीं खाते, तो उन्हें ओरल कैंसर का जोखिम नहीं होगा। जबकि सच्चाई यह है कि कुछ छोटी और आम लगने वाली आदतें भी धीरे-धीरे कैंसर की राह खोल सकती हैं। रोज़ाना एक ड्रिंक लेना भी उन्हीं छिपे हुए खतरों में से एक है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

रिसर्च में क्या सामने आया?

सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी और होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट की एक अहम रिसर्च में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, भारत में मुंह के कैंसर के 10 में से 6 से ज्यादा मामले शराब और गुटखा, खैनी, पान जैसे धुआं रहित तंबाकू उत्पादों के सेवन से जुड़े हैं। रिसर्च यह भी बताती है कि देश में होने वाले कुल ओरल कैंसर मामलों में लगभग 62 प्रतिशत मामलों की वजह तंबाकू और शराब का सेवन है।

हालांकि तंबाकू को मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है, लेकिन रिपोर्ट्स यह साफ करती हैं कि शराब भी इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। यानी अगर कोई व्यक्ति शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करता है, तो जोखिम और भी ज्यादा हो जाता है।

शराब से मुंह के कैंसर का खतरा क्यों बढ़ता है?

डॉक्टरों के अनुसार, शराब शरीर में पहुंचते ही एसीटैल्डिहाइड नामक एक जहरीले तत्व में बदल जाती है। यह तत्व मुंह की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कैंसर बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा शराब मुंह के अंदर मौजूद टिशूज़ को कमजोर और क्षतिग्रस्त कर देती है, जिससे हानिकारक केमिकल्स और बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर पाते हैं।

एक और बड़ा कारण यह है कि शराब लार (सलाइवा) के बनने की प्रक्रिया को कम कर देती है। लार मुंह की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली की तरह काम करती है, जो बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स से बचाव करती है। जब लार कम बनने लगती है, तो सूजन और इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर कोशिकाओं की मरम्मत ठीक से नहीं हो पाती और वही कोशिकाएं धीरे-धीरे कैंसरग्रस्त हो सकती हैं।

मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

मुंह के कैंसर की सबसे अच्छी बात यह है कि अगर इसे शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए, तो इलाज काफी हद तक संभव होता है। इसके कुछ संकेत शुरू में ही दिखाई देने लगते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे—मुंह के अंदर लंबे समय तक सफेद या लाल रंग के धब्बे बने रहना, मुंह खोलने में परेशानी होना, बिना किसी स्पष्ट वजह के खून आना, दांतों का अचानक ढीला होना या खाने-पीने में दर्द महसूस होना।

अगर ऐसे लक्षण 2 से 3 हफ्तों से ज्यादा समय तक बने रहें, तो देरी किए बिना डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है। समय रहते जांच और सही सलाह ही मुंह के कैंसर जैसे गंभीर खतरे से बचाव का सबसे मजबूत हथियार हो सकती है।

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