बॉलीवुड अभिनेत्री भाग्यश्री आज भी अपनी फिटनेस, ग्लोइंग स्किन और स्वस्थ जीवनशैली के लिए जानी जाती हैं। बढ़ती उम्र के बावजूद उनकी ऊर्जा और फिटनेस लोगों को प्रेरित करती है। वह नियमित रूप से योग, संतुलित आहार और हेल्दी रूटीन को फॉलो करती हैं। सोशल मीडिया पर भी भाग्यश्री अक्सर अपने प्रशंसकों के साथ स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े उपयोगी टिप्स साझा करती रहती हैं। हाल ही में उन्होंने एक वीडियो के माध्यम से महिलाओं में तेजी से बढ़ रही समस्या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) को लेकर चर्चा की और इससे राहत पाने के लिए एक घरेलू उपाय भी बताया।
पीसीओएस महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल समस्या है, जो शरीर में हार्मोन के असंतुलन के कारण विकसित होती है। इसके चलते अनियमित मासिक धर्म, चेहरे पर अनचाहे बाल, वजन बढ़ना, मुंहासे और प्रजनन संबंधी परेशानियां जैसी कई समस्याएं सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसी विषय पर बात करते हुए भाग्यश्री ने मुलेठी से बनी चाय को लाभकारी बताया।
भाग्यश्री ने बताई मुलेठी की चाय की खासियत
अभिनेत्री के अनुसार, मुलेठी शरीर में एंड्रोजन हार्मोन के स्तर को संतुलित करने में मदद कर सकती है। एंड्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर पीसीओएस से जुड़ी कई समस्याओं को बढ़ा सकता है। ऐसे में मुलेठी का सेवन कुछ महिलाओं के लिए सहायक साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस घरेलू पेय को बनाना बेहद आसान है और इसे नियमित रूप से सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।
मुलेठी की चाय बनाने का आसान तरीका
भाग्यश्री द्वारा साझा किए गए तरीके के अनुसार सबसे पहले मुलेठी की जड़ का एक छोटा टुकड़ा लें। इसके बाद एक कप पानी में इसे डालकर धीमी आंच पर लगभग 5 से 7 मिनट तक उबालें। जब पानी अच्छी तरह पक जाए तो इसे छान लें और हल्का गुनगुना होने पर सेवन करें। उनका मानना है कि यह पेय पीसीओएस से जुड़ी कुछ परेशानियों को कम करने में मदद कर सकता है।
जीवनशैली में बदलाव भी है जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय जीवनशैली में सुधार करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। पीसीओएस को नियंत्रित करने के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, बीज और मेवे शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।
इसके अलावा शरीर में विटामिन डी का स्तर बनाए रखने के लिए रोजाना कुछ समय धूप में बिताना चाहिए। साथ ही रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अत्यधिक शर्करा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी लाभदायक हो सकता है। यह कदम इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो पीसीओएस से जुड़ी प्रमुख समस्याओं में से एक है।
नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन पर दें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पीसीओएस से जूझ रही महिलाओं को अपने रूटीन में शारीरिक गतिविधियों को जरूर शामिल करना चाहिए। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम करने से वजन नियंत्रित रखने और हार्मोन संतुलित करने में सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही योग, ध्यान और अन्य तनाव कम करने वाली गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।
नियमित व्यायाम और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से न केवल पीसीओएस के लक्षणों में सुधार हो सकता है, बल्कि प्रजनन क्षमता बेहतर होने, वजन नियंत्रित रखने और टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम करने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी कम हो सकता है।
हालांकि किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं।













