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दो सप्ताह फ्लॉप, चौथे में ब्लॉकबस्टर! ‘हनुमान अंश’ ने बदल दी बॉक्स ऑफिस की पूरी कहानी

सिनेमा का इतिहास यह भी बताता है कि दर्शक जब किसी फिल्म को देर से अपनाते हैं तो शुरुआती आंकड़े पूरी तरह बेमानी साबित हो सकते हैं। ‘हनुमान अंश’ ने 2026 में इसी पुराने सच को एक बार फिर सामने ला दिया है।......

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Tue, 01 Sep 2026 5:46:30

दो सप्ताह फ्लॉप, चौथे में ब्लॉकबस्टर! ‘हनुमान अंश’ ने बदल दी बॉक्स ऑफिस की पूरी कहानी

—राजेश कुमार भगताणी


भारतीय सिनेमा में किसी फिल्म के लिए फैसला सुनाने में अब ज्यादा वक्त नहीं लगता। पहला दिन कमजोर रहा तो सवाल उठने लगते हैं, पहला सप्ताह उम्मीद के मुताबिक नहीं गया तो फिल्म को असफल मानने की तैयारी शुरू हो जाती है और दूसरे सप्ताह तक कई फिल्में सिनेमाघरों से लगभग गायब हो जाती हैं। लेकिन सिनेमा का इतिहास यह भी बताता है कि दर्शक जब किसी फिल्म को देर से अपनाते हैं तो शुरुआती आंकड़े पूरी तरह बेमानी साबित हो सकते हैं। ‘हनुमान अंश’ ने 2026 में इसी पुराने सच को एक बार फिर सामने ला दिया है।

नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक प्रभाव से प्रेरित इस फिल्म ने सिनेमाघरों में बेहद मामूली शुरुआत की। पहले दिन इसका कारोबार महज करीब 10 लाख रुपये रहा और शुरुआती दो सप्ताह में फिल्म लगभग 1.48 करोड़ रुपये ही जुटा सकी। उस समय इसे लेकर निराशा स्वाभाविक थी। लेकिन तीसरे सप्ताह से तस्वीर अचानक बदलने लगी। तीसरे सप्ताह में फिल्म ने 10.40 करोड़ रुपये का कारोबार किया और चौथे सप्ताह में इसकी रफ्तार और तेज हो गई। 25वें दिन फिल्म ने अकेले 5.50 करोड़ रुपये का शुद्ध कारोबार किया। इसके साथ भारत में इसका शुद्ध कारोबार 45.63 करोड़ रुपये और सकल कारोबार 53.82 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

यही इस फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि है। जिस फिल्म को शुरुआती दो सप्ताह के बाद लगभग खत्म मान लिया गया था, वही चौथे सप्ताह में अपनी सबसे मजबूत स्थिति में खड़ी है। यह सिर्फ एक फिल्म की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच के लिए भी जवाब है जो किसी फिल्म का भविष्य उसके शुरुआती कुछ दिनों के कारोबार से तय कर देती है।

जब निर्माता-निर्देशक ने फिल्म को बचाने की कोशिश की

‘हनुमान अंश’ की वापसी अपने आप नहीं हुई। शुरुआती दो सप्ताह की कमजोर स्थिति के बाद फिल्म से जुड़े लोगों ने हार मानने के बजाय दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश जारी रखी। निर्माता, निर्देशक और अभिनेता ने अलग-अलग शहरों का दौरा किया, सिनेमाघर मालिकों से मुलाकात की और फिल्म को अधिक शो देने का आग्रह किया। उनका मकसद साफ था—फिल्म को कम से कम इतना अवसर मिले कि जिन दर्शकों तक इसकी चर्चा पहुंच रही है, वे इसे सिनेमाघर में जाकर देख सकें।

यहीं से इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है। किसी फिल्म को दर्शकों की पसंद बनने के लिए पहले दर्शकों तक पहुंचना भी जरूरी है। जब किसी फिल्म के शो कम हो जाते हैं तो उसकी चर्चा के बावजूद दर्शक उसे देख नहीं पाते। ‘हनुमान अंश’ के मामले में फिल्म की टीम ने इसी बाधा को तोड़ने की कोशिश की और धीरे-धीरे उसका असर दिखाई देने लगा।

फिल्म को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया और दर्शकों के बीच बनी चर्चा ने इसके कारोबार को तेजी से बढ़ाया। रिपोर्टों में भी सकारात्मक वर्ड ऑफ माउथ को इसकी सफलता का अहम कारण बताया गया है।

तीसरे सप्ताह में बदला समीकरण

बॉक्स ऑफिस पर किसी फिल्म के तीसरे सप्ताह में अचानक उछाल आना अपने आप में असामान्य बात है। आम तौर पर फिल्म की कमाई पहले सप्ताह में सबसे ज्यादा होती है और उसके बाद धीरे-धीरे घटती जाती है। ‘हनुमान अंश’ ने इस सामान्य गणित को उलट दिया।

पहले सप्ताह में लगभग 1.08 करोड़ रुपये और दूसरे सप्ताह में करीब 40 लाख रुपये की कमाई करने वाली फिल्म ने तीसरे सप्ताह में 10.40 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके बाद चौथे सप्ताह में तो इसकी रफ्तार और भी चौंकाने वाली हो गई। 22वें दिन 6.25 करोड़, 23वें दिन 9.25 करोड़ और 24वें दिन 12.75 करोड़ रुपये की शुद्ध कमाई ने यह साफ कर दिया कि अब फिल्म को शुरुआती दर्शकों से कहीं आगे का समर्थन मिल रहा है।

चौथे सप्ताह में 12.75 करोड़ रुपये का एक दिन का कारोबार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस स्तर की कमाई आमतौर पर किसी फिल्म के शुरुआती दौर में देखने को मिलती है, न कि प्रदर्शन के 24वें दिन। यही वह आंकड़ा है जिसने ‘हनुमान अंश’ को एक साधारण धीमी शुरुआत वाली फिल्म से बॉक्स ऑफिस की असाधारण वापसी वाली फिल्म बना दिया।

सफलता का सबसे बड़ा कारण क्या रहा?

इसका जवाब केवल एक शब्द में दिया जाए तो वह है—दर्शक।

फिल्म की विषयवस्तु ने एक ऐसे दर्शक वर्ग को आकर्षित किया, जिसके लिए नीम करौली बाबा का जीवन और आध्यात्मिक विरासत पहले से भावनात्मक महत्व रखती है। इसके बाद फिल्म देखने वाले दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया धीरे-धीरे अन्य लोगों तक पहुंची। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत सिफारिशों ने इस चर्चा को और फैलाया। जब लोगों ने फिल्म को देखना शुरू किया तो सिनेमाघरों में उसकी मांग बढ़ी और फिर बढ़े हुए शो ने नए दर्शकों के लिए रास्ता बनाया।

यहां एक और बात महत्वपूर्ण है। ‘हनुमान अंश’ किसी बड़े सितारे या विशाल प्रचार अभियान के सहारे सिनेमाघरों में नहीं आई थी। इसकी शुरुआती पहचान सीमित थी। ऐसे में फिल्म के लिए सबसे प्रभावी प्रचार वही बना जो दर्शकों ने स्वयं किया। एक दर्शक ने दूसरे को फिल्म देखने के लिए कहा और धीरे-धीरे यही सिलसिला बॉक्स ऑफिस पर दिखाई देने लगा।

यही वर्ड ऑफ माउथ किसी फिल्म की सबसे ताकतवर प्रचार व्यवस्था बन सकता है। इसमें पैसा कम लगता है, लेकिन असर बहुत गहरा होता है।

भारतीय सिनेमा में ऐसा पहले भी हुआ है


‘हनुमान अंश’ की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि भारतीय सिनेमा में शुरुआती असफलता के बाद फिल्मों के पलटकर इतिहास बनाने की मिसालें पहले से मौजूद हैं। इनमें ‘शोले’ और ‘डॉन’ के नाम विशेष रूप से याद किए जाते हैं।

15 अगस्त 1975 को प्रदर्शित ‘शोले’ की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई थी। शुरुआती प्रतिक्रिया को लेकर फिल्म से जुड़े लोगों में चिंता पैदा हुई और यहां तक कि फिल्म के कुछ हिस्सों में बदलाव तथा क्लाइमैक्स पर दोबारा विचार करने की स्थिति बनी। सलीम-जावेद अपने लेखन को लेकर आश्वस्त थे और जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी गई। इसके बाद फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी जगह बनानी शुरू की और फिर वही ‘शोले’ भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल हो गई।

‘डॉन’ की कहानी भी इसी बात की याद दिलाती है। 1978 में अमिताभ बच्चन अभिनीत यह फिल्म शुरुआत में उस तरह नहीं चली जिसकी उम्मीद थी, लेकिन बाद में दर्शकों ने इसे अपनाया और फिल्म बड़ी सफलता में बदल गई। इसकी कहानी के पीछे निर्माता नरीमन ईरानी का संघर्ष भी जुड़ा था। फिल्म पूरी होने से पहले ही उनका निधन हो गया और उनके साथियों ने इसे पूरा किया। बाद में फिल्म की कमाई से उनके आर्थिक दायित्वों को पूरा करने में मदद मिली।

इन दोनों फिल्मों का उल्लेख यहां इसलिए नहीं कि ‘हनुमान अंश’ की तुलना सीधे उनसे की जाए। तीनों फिल्मों का दौर, बजट, विषय और बाजार बिल्कुल अलग है। लेकिन इनकी यात्राएं एक बात जरूर साबित करती हैं—फिल्म का पहला बॉक्स ऑफिस फैसला हमेशा उसका अंतिम फैसला नहीं होता।

‘हनुमान अंश’ ने बदल दिया सफलता का समय

‘हनुमान अंश’ की सबसे बड़ी कहानी उसके आंकड़ों में छिपी है। पहले दिन 10 लाख रुपये, दो सप्ताह में लगभग 1.48 करोड़ रुपये और फिर तीसरे सप्ताह में 10.40 करोड़ रुपये। चौथे सप्ताह में फिल्म ने जिस तरह छलांग लगाई, उसने बॉक्स ऑफिस के सामान्य गणित को उलट दिया।

यानी फिल्म की सफलता पहले सप्ताह में नहीं, दर्शकों के भरोसे के धीरे-धीरे बनने के बाद आई।

यही कारण है कि इसे केवल एक धार्मिक फिल्म की सफलता कह देना पर्याप्त नहीं होगा। यह उस बदलते दर्शक व्यवहार का भी उदाहरण है जिसमें लोग फिल्म को बड़े सितारे, बड़े बजट या पहले दिन की चर्चा के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी रुचि और दूसरे दर्शकों की प्रतिक्रिया के आधार पर चुन रहे हैं।

फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने भी शुरुआती दौर में फिल्म को जल्दबाजी में असफल घोषित किए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि किसी फिल्म की सफलता का आकलन उसके शुरुआती कारोबार के बजाय लंबे समय तक मिलने वाले दर्शक समर्थन से किया जाना चाहिए।

असफलता और सफलता के बीच सिर्फ एक फर्क है—समय

‘हनुमान अंश’ की कहानी का सबसे बड़ा सबक शायद यही है कि बॉक्स ऑफिस पर किसी फिल्म को समय से पहले खारिज कर देना हमेशा सही नहीं होता। हर कमजोर शुरुआत करने वाली फिल्म बाद में सफल नहीं होती, लेकिन कुछ फिल्मों में ऐसी क्षमता जरूर होती है जिसे पहचानने के लिए शुरुआती सप्ताह पर्याप्त नहीं होते।

‘शोले’ ने अपने दौर में यह साबित किया था। ‘डॉन’ ने इसे एक अलग अंदाज में दोहराया। और अब ‘हनुमान अंश’ ने कम बजट, सीमित शुरुआत और कमजोर शुरुआती दो सप्ताह के बावजूद चौथे सप्ताह में जिस तरह का कारोबार किया है, उसने एक बार फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है—क्या किसी फिल्म को फ्लॉप कहने में जल्दबाजी की जा रही है?

बॉक्स ऑफिस का पहला दिन केवल शुरुआत बताता है, पूरी कहानी नहीं। पहला सप्ताह तस्वीर दिखाता है, लेकिन कभी-कभी तीसरा और चौथा सप्ताह असली फैसला सुनाता है।

‘हनुमान अंश’ के साथ फिलहाल यही हुआ है।

जिस फिल्म की शुरुआत महज 10 लाख रुपये से हुई थी, वह 25वें दिन 5.50 करोड़ रुपये का एक दिन का कारोबार कर रही है और 45.63 करोड़ रुपये के भारत शुद्ध कारोबार तक पहुंच चुकी है।

कभी-कभी फिल्म को बचाने के लिए बड़े सितारे नहीं, सिर्फ थोड़ा समय और दर्शकों तक पहुंचने का मौका चाहिए होता है। ‘हनुमान अंश’ ने यही मौका हासिल किया—और फिर दर्शकों ने उसकी पूरी कहानी बदल दी।

यह भी पढ़ें: कौन हैं शोभिनव सत्य? नीम करोली बाबा बनकर पहली ही फिल्म में जीता दर्शकों का दिल

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