नाना पाटेकर की जिंदगी के आखिरी दिनों में भी बेटे मल्हार पाटेकर की सेहत उनकी चिंता की वजह बनी हुई थी। पिता को खोने के बाद मल्हार ने उनके साथ हुई आखिरी बातचीत को याद किया और बताया कि उस समय नाना साहेब को अपनी सेहत से ज्यादा बेटे की फिक्र थी। मल्हार की तबीयत पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रही थी और नाना इसे लेकर परेशान थे। पिता के आखिरी शब्दों को याद करते हुए मल्हार ने कहा, 'मेरे लिए बस इतना ही काफी है कि तू बस अपनी तबीयत का ध्यान रख।' हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर की सुबह 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। संदर्भ में दी गई जानकारी के मुताबिक, गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया था। वहां करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर पुणे लाया गया। उसी दिन देर रात डोंजे गांव में उनके फार्महाउस के पास अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान नाना पाटेकर की पत्नी नीलकांति भी मौजूद थीं।
पिता की आखिरी बात याद कर भावुक हुए मल्हार
नाना पाटेकर के निधन के बाद मल्हार ने मीडिया से बातचीत में अपने पिता को याद किया। उन्होंने कहा कि नाना साहेब जैसे लोग वास्तव में कभी नहीं जाते, बल्कि लोगों के बीच अपने काम और यादों के जरिए हमेशा जिंदा रहते हैं। मल्हार ने पिता के साथ हुई आखिरी बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं थी। इस वजह से नाना पाटेकर उनकी सेहत को लेकर चिंतित थे। आखिरी बातचीत में भी उन्होंने बेटे को अपनी देखभाल करने की सलाह दी थी। मल्हार की बातों से उनके पिता के साथ हुए उस निजी संवाद की जानकारी सामने आई, जिसमें नाना पाटेकर अपने बेटे की सेहत को लेकर परेशान थे। मल्हार ने इस बातचीत को याद करते हुए पिता के नजरिए और उनके व्यक्तित्व का भी जिक्र किया।
देर रात अंतिम संस्कार करने की क्या थी वजह?
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार 8 अक्टूबर की देर रात किया गया। अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को रखे जाने की उम्मीद कर रहे लोगों के बीच यह सवाल भी उठा कि परिवार ने अंतिम संस्कार उसी रात क्यों कर दिया। मल्हार ने मीडिया को बताया कि अंतिम संस्कार देर रात करने के पीछे कोई विशेष वजह नहीं थी। उनके मुताबिक, नाना पाटेकर का निधन गुरुवार सुबह हो गया था और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसी कारण परिवार ने रात में ही अंतिम क्रिया पूरी करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार धार्मिक विधियों और मंत्रोच्चार के साथ किया गया। मल्हार ने स्वयं पिता को मुखाग्नि दी और उनके पैर छूकर अंतिम विदाई दी। नाना पाटेकर की पत्नी नीलकांति भी इस दौरान मौजूद थीं।
पिता के सामाजिक कामों को आगे बढ़ाएंगे मल्हार
पिता को याद करने के साथ मल्हार ने उनके सामाजिक कार्यों को जारी रखने की बात भी कही। नाना पाटेकर 'नाम' फाउंडेशन के माध्यम से जल संरक्षण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे थे। इन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कई लोगों को जिम्मेदारियां भी सौंप रखी थीं। मल्हार ने स्पष्ट किया कि उनके पिता का शुरू किया गया काम रुकने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'नाना साहेब का काम आगे बढ़ाया जाएगा।' उन्होंने मराठवाड़ा में प्रस्तावित कार्यों का भी जिक्र किया। मल्हार के मुताबिक, इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के सिलसिले में उनकी मुख्यमंत्री से बातचीत हुई है। उन्होंने पिता के सामाजिक कार्यों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
नाना पाटेकर की विरासत को आगे ले जाने की तैयारी
नाना पाटेकर के निधन के बाद मल्हार ने पिता की आखिरी बातचीत, उनके विचारों और सामाजिक कार्यों को याद किया। जहां आखिरी बातचीत में नाना की चिंता बेटे की सेहत को लेकर थी, वहीं मल्हार ने उनके अधूरे सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही है। 'नाम' फाउंडेशन के जरिए जल संरक्षण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में चल रहे काम तथा मराठवाड़ा की प्रस्तावित योजनाओं को जारी रखने के उनके बयान इस बात को रेखांकित करते हैं कि परिवार इन जिम्मेदारियों को आगे ले जाने की तैयारी कर रहा है।














