आजकल कई लोगों के बाल 20 से 30 साल की उम्र में ही सफेद होने लगते हैं। ऐसे में लोग अक्सर सफेद बालों को छिपाने के लिए हेयर कलर या डाई का सहारा लेते हैं। लेकिन बालों का सफेद होना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। उम्र बढ़ने के साथ बालों में रंग बनाने वाले पिगमेंट मेलेनिन का उत्पादन कम होने लगता है, जिससे बाल धीरे-धीरे सफेद दिखाई देने लगते हैं। हालांकि, अगर कम उम्र में बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं, तो खान-पान और रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। तनाव, नींद की कमी और कुछ पोषक तत्वों की कमी भी कुछ लोगों में समय से पहले बाल सफेद होने से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में बालों की देखभाल के साथ शरीर को जरूरी पोषण देना भी महत्वपूर्ण है।
1. डाइट में शामिल करें प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व
बालों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए संतुलित आहार जरूरी है। शरीर में प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी12, फोलेट और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी होने पर बालों की सेहत प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना के भोजन में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करना फायदेमंद है। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अंडे, दूध, दही, पनीर, फल, मेवे और बीज खा सकते हैं। ये खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद करते हैं। हालांकि, केवल इन चीजों को खाने से सफेद हो चुके बालों का रंग वापस काला होने की गारंटी नहीं है। संतुलित आहार का उद्देश्य बालों सहित पूरे शरीर की सेहत बनाए रखना है।
2. बालों की देखभाल के लिए खाएं आंवला
आंवला लंबे समय से बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं, जो शरीर को पोषण देने में भूमिका निभाते हैं। इसे अपनी पसंद के अनुसार भोजन में शामिल किया जा सकता है।
आंवला खाने से बालों की सामान्य सेहत को सहारा मिल सकता है, लेकिन यह दावा करना सही नहीं होगा कि इसके सेवन से सफेद बाल निश्चित रूप से दोबारा काले हो जाते हैं या बालों का सफेद होना रुक जाता है। समय से पहले बाल सफेद होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, इसलिए केवल आंवले पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार पर ध्यान दें।
3. नारियल तेल से करें सिर की हल्की मालिश
बालों की देखभाल के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल एक आसान तरीका है। इससे बालों और सिर की त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। खासकर रूखे और बेजान बालों में तेल लगाने से बाल मुलायम महसूस हो सकते हैं। नारियल तेल से सिर की हल्के हाथों से मालिश कर सकते हैं। इसे बालों की जरूरत और अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करें। ध्यान रखें कि तेल बालों को रूखेपन से बचाने में मदद कर सकता है, लेकिन सफेद हो चुके बालों को फिर से काला करने या मेलेनिन का उत्पादन बढ़ाने का प्रमाणित उपाय नहीं है।
4. तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें
लगातार तनाव का असर शरीर की सेहत पर पड़ सकता है। कुछ शोधों में तनाव और समय से पहले बाल सफेद होने के बीच संभावित संबंध भी पाया गया है। इसलिए रोजमर्रा की व्यस्तता के बीच अपने लिए थोड़ा समय निकालना उपयोगी हो सकता है। आप अपनी दिनचर्या में टहलना, व्यायाम, योग या ध्यान जैसी गतिविधियों को शामिल कर सकते हैं। इसके साथ पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। आराम और नियमित दिनचर्या शरीर की सामान्य सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि, तनाव कम करने या अच्छी नींद लेने से सफेद बालों का रंग वापस आने की गारंटी नहीं होती।
5. धूम्रपान से बनाएं दूरी
धूम्रपान का असर केवल फेफड़ों और हृदय की सेहत तक सीमित नहीं है। कुछ शोधों में धूम्रपान और समय से पहले बाल सफेद होने के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, इससे हर व्यक्ति में बाल सफेद होने का कारण साबित नहीं होता। अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ना आपकी समग्र सेहत के लिए एक अच्छा कदम है। बालों की देखभाल के साथ ऐसी आदतों पर ध्यान देना भी जरूरी है, जो लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
6. बालों पर बार-बार हीट और केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें
बालों को बार-बार तेज गर्मी देना, लगातार बहुत टाइट हेयरस्टाइल बनाना और कुछ केमिकल प्रोडक्ट्स का अधिक इस्तेमाल बालों को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे बाल रूखे, कमजोर और टूटने वाले हो सकते हैं। हालांकि, इन आदतों को बालों के सफेद होने का सीधा कारण मानना सही नहीं है। बालों की देखभाल के लिए अपनी जरूरत के अनुसार माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करें और बालों को जरूरत के मुताबिक धोएं। हीट स्टाइलिंग का इस्तेमाल सीमित रखें और बालों को बहुत कसकर बांधने से बचें। इससे बालों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
कम उम्र में तेजी से सफेद हो रहे हैं बाल, तो क्या करें?
अगर कम उम्र में बाल अचानक या तेजी से सफेद होने लगें, तो सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। कुछ लोगों में विटामिन बी12 या आयरन की कमी और थायराइड से जुड़ी समस्याओं की जांच जरूरी हो सकती है। डॉक्टर आपकी स्थिति और लक्षणों के आधार पर तय कर सकते हैं कि किसी जांच या उपचार की जरूरत है या नहीं।













