आजकल कई लोगों के बाल कम उम्र में ही सफेद होने लगते हैं। बालों में चांदी जैसी लटें दिखने पर अक्सर लोग परेशान हो जाते हैं और तरह-तरह के उपाय आजमाने लगते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर बाल समय से पहले सफेद क्यों होने लगते हैं? इसके पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ खानपान और जीवनशैली से जुड़ी कुछ आदतें भी भूमिका निभा सकती हैं।
मशहूर सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने बालों की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए खानपान और देखभाल पर ध्यान देने की बात कही है। बालों को स्वस्थ रखने के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि शरीर को पर्याप्त पोषण देना भी जरूरी है। आइए जानते हैं बालों में सफेदी आने के संभावित कारण क्या हैं और उनकी सेहत बनाए रखने के लिए किन आदतों को अपनाया जा सकता है।
बाल समय से पहले सफेद क्यों होने लगते हैं?
1. आनुवंशिक कारण हो सकते हैं जिम्मेदार
बालों का सफेद होना उम्र बढ़ने के साथ होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि, कुछ लोगों के बाल दूसरों की तुलना में जल्दी सफेद होने लगते हैं। इसके पीछे आनुवंशिक यानी जेनेटिक कारण अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर परिवार में माता-पिता या अन्य करीबी रिश्तेदारों के बाल कम उम्र में सफेद हुए हैं, तो अगली पीढ़ी में भी ऐसा होने की संभावना हो सकती है। बालों का प्राकृतिक रंग मेलेनिन नामक पिगमेंट से तय होता है। बालों में मेलेनिन का उत्पादन कम होने पर उनका रंग हल्का पड़ने लगता है और धीरे-धीरे बाल सफेद दिखाई देने लगते हैं। इसलिए कम उम्र में बाल सफेद होने की वजह हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती।
2. बहुत सख्त डाइट लेने से हो सकती है पोषक तत्वों की कमी
बालों की सेहत बनाए रखने के लिए शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना जरूरी है। अगर आप वजन कम करने के लिए बहुत सख्त डाइट ले रहे हैं या खाने-पीने की कई चीजों को अपनी डाइट से हटा चुके हैं, तो शरीर में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। आयरन, विटामिन बी12 और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी बालों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। इसलिए डाइट में बदलाव करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि शरीर को पर्याप्त पोषण मिल रहा हो। हालांकि, बालों में सफेदी आने का कारण केवल पोषक तत्वों की कमी ही नहीं होता। आनुवंशिक कारण भी इसमें महत्वपूर्ण होते हैं।
3. नींद की कमी, धूम्रपान और शराब का सेवन
जीवनशैली की कुछ आदतें भी बालों की सेहत पर असर डाल सकती हैं। पर्याप्त नींद न लेना, धूम्रपान करना और शराब का सेवन शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़ा हो सकता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस तब होता है, जब शरीर में हानिकारक मुक्त कणों और उन्हें नियंत्रित करने वाली एंटीऑक्सिडेंट क्षमता के बीच संतुलन बिगड़ जाता है।
यह प्रक्रिया शरीर की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकती है। बालों में समय से पहले सफेदी आने में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की संभावित भूमिका पर भी चर्चा होती है, हालांकि किसी एक आदत को हर व्यक्ति में सफेद बालों का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।
बालों को हेल्दी रखने के लिए अपनाएं ये 3 तरीके
1. डाइट में शामिल करें अलग-अलग तरह की दालें
रुजुता दिवेकर खानपान में विविधता रखने पर जोर देती हैं। बालों की सेहत के लिए डाइट में अलग-अलग प्रकार की दालों को शामिल करना उपयोगी हो सकता है। दालें प्रोटीन, आयरन और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों का स्रोत हैं, जो शरीर की सामान्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं।
अगर आप रोजाना एक ही तरह की दाल खाते हैं, तो अपने भोजन में मूंग, मसूर, अरहर और उड़द जैसी अलग-अलग दालों को शामिल कर सकते हैं। इससे खाने में विविधता आती है और शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं। बालों की सेहत के लिए संतुलित आहार जरूरी है, इसलिए केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा के भोजन में पोषण का ध्यान रखें।
2. बालों में लगाएं तेल और हल्के हाथों से करें मालिश
बालों की देखभाल के लिए तेल लगाना कई लोगों की नियमित दिनचर्या का हिस्सा होता है। नारियल या तिल के तेल का इस्तेमाल बालों और सिर की त्वचा की जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। सिर पर हल्के हाथों से मालिश करने से आराम मिल सकता है और बालों को सुलझाना व संभालना आसान हो सकता है।
तेल लगाते समय सिर की त्वचा पर जोर से रगड़ने या बालों को खींचने से बचें। अपनी सुविधा और बालों के प्रकार के अनुसार तेल का चुनाव करें। ध्यान रखें कि तेल लगाने से बालों का सफेद होना रुकने या पहले से सफेद बालों का प्राकृतिक रंग वापस आने की गारंटी नहीं होती। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से बालों की नियमित देखभाल के हिस्से के रूप में किया जा सकता है।
3. केमिकल ट्रीटमेंट और हीट स्टाइलिंग का इस्तेमाल कम करें
बालों को बार-बार स्ट्रेट करना, कर्ल करना या केमिकल ट्रीटमेंट कराना उनकी बाहरी परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे बाल रूखे, कमजोर और टूटने के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इसलिए अगर आप बालों को स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं, तो बार-बार ऐसे ट्रीटमेंट कराने से बचें और तेज गर्मी वाले स्टाइलिंग टूल्स का इस्तेमाल भी सीमित रखें।
बाल सुखाने के लिए हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करते हैं, तो कम तापमान चुनें। स्ट्रेटनर और कर्लर जैसे उपकरणों की तेज गर्मी बालों की नमी को प्रभावित कर सकती है, जिससे बालों में रूखापन और टूटने की समस्या बढ़ सकती है। हीट स्टाइलिंग और केमिकल ट्रीटमेंट कम करने से बालों को होने वाले नुकसान को सीमित करने में मदद मिल सकती है।














