अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को एक वर्ष पूरा हो चुका है। 20 जनवरी 2025 को सत्ता संभालने के बाद ट्रंप ने बीते एक साल में कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी। लेकिन जब उनसे यह सवाल किया गया कि उनके लिए साल 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही, तो ट्रंप ने बिना देर किए भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को अपनी सबसे बड़ी सफलता करार दिया।
ट्रंप का कहना है कि भारत-पाक तनाव जिस स्तर तक पहुंच गया था, वहां हालात बेहद खतरनाक हो चुके थे। उनके मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों के बीच टकराव इतना बढ़ गया था कि परमाणु संघर्ष की आशंका तक पैदा हो गई थी। ऐसे हालात में युद्ध को रोकना और सीजफायर कराना उनके एक साल के कार्यकाल की सबसे अहम कूटनीतिक जीत रही।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर ट्रंप का बड़ा दावाएक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा, “पिछले करीब 10 महीनों में मैंने आठ युद्ध रुकवाए हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक थी। हालात बेहद बिगड़ चुके थे।” ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई लड़ाकू विमानों को मार गिराया था और तनाव तेजी से नियंत्रण से बाहर जा रहा था।
उन्होंने आगे कहा, “मेरे हिसाब से उस समय परमाणु हमले की स्थिति बन चुकी थी। अगर हमने दखल नहीं दिया होता, तो हालात पूरी दुनिया के लिए तबाही लेकर आ सकते थे।”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का हवाला देकर ट्रंप का दावाट्रंप ने अपने बयान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के वाशिंगटन दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यहां आए थे, तो उन्होंने खुद माना था कि ट्रंप ने एक करोड़ या उससे भी ज्यादा लोगों की जान बचाई है।” ट्रंप ने इसे अपनी कूटनीतिक भूमिका की पुष्टि बताया।
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर फिर बोले ट्रंपइस दौरान ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा, “मैंने जितने युद्ध रुकवाए हैं, उसके लिए मुझे हर बार नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। मैंने लाखों नहीं, करोड़ों लोगों की जान बचाई है।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया मचाडो ने खुद कहा है कि असल हकदार वह नहीं, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप हैं। ट्रंप के मुताबिक, मचाडो ने माना है कि वैश्विक शांति में ट्रंप की भूमिका सबसे अहम रही है।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़ा जवाब दिया था। इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई में कई आतंकी अड्डों को तबाह कर दिया गया था।
भारत की इस सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी सेना भी आतंकियों के समर्थन में सामने आई, लेकिन भारतीय बलों ने जोरदार जवाब देते हुए पाकिस्तान के कई एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाया था। दोनों देशों के बीच यह सैन्य टकराव करीब चार दिनों तक चला।
भारत ने तीसरे देश की मध्यस्थता से किया इनकारइस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारत ने स्पष्ट रूप से किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता को नकार दिया था। भारत सरकार का कहना रहा कि सीजफायर दोनों देशों के बीच आपसी बातचीत और सैन्य स्तर पर हुए संपर्क का नतीजा था।
इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस संघर्षविराम का श्रेय लेने की कोशिश करते रहे हैं। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका ने व्यापार रोकने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान दोनों पीछे हटे। हालांकि, भारत ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज किया है।