अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच छिड़े सैन्य टकराव का आज चौथा दिन है और हालात लगातार विस्फोटक होते जा रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पूर्व प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में उठाए गए कदमों की वजह से ही ईरान परमाणु हथियार हासिल करने से रुक पाया।
ट्रंप ने कहा कि यदि उन्होंने अपने शासनकाल में ईरान परमाणु समझौते को समाप्त करने का निर्णय न लिया होता, तो तेहरान अब तक परमाणु शक्ति बन चुका होता। उनका इशारा उस बहुपक्षीय समझौते की ओर था, जिसे औपचारिक रूप से Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) कहा जाता है। यह समझौता Barack Obama के कार्यकाल में हुआ था और बाद में Joe Biden प्रशासन ने भी कूटनीतिक रुख बनाए रखा।
ट्रंप ने एक पोस्ट में लिखा, “ओबामा का ईरान परमाणु समझौता बेहद खतरनाक था। अगर मैंने इसे रद्द नहीं किया होता, तो ईरान तीन साल पहले ही परमाणु हथियार बना लेता। दुनिया की सुरक्षा के लिहाज से यह सबसे खराब समझौतों में से एक था।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासन की नीतियों ने ईरान को मजबूत होने का मौका दिया।
“ईरान पर हमले अभी थमने वाले नहीं”राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले चार से पांच हफ्तों तक संघर्ष जारी रह सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नियंत्रण से बाहर होते हैं, तो जमीनी सैनिकों की तैनाती भी की जा सकती है।
ट्रंप का दावा है कि ईरान ऐसी लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा था, जो अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम हों। उनके अनुसार, यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा था और इसी कारण सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया।
ईरान का पलटवार, जंग जारी रखने का ऐलानट्रंप की चेतावनी पर ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अमेरिका और इज़रायल पर आम नागरिकों, मरीजों और बच्चों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। पेजेश्कियान ने कहा कि ऐसे हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को कठोर दंड मिलेगा और ईरान अपने खिलाफ हुई हर कार्रवाई का जवाब देता रहेगा।
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि यह संघर्ष केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर भी जवाब दिया जाएगा। तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है।
28 फरवरी के हमले के बाद बढ़ा तनाव28 फरवरी को हुए संयुक्त अमेरिकी-इज़रायली हमलों ने इस टकराव को निर्णायक मोड़ दे दिया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei, उनके परिवार के कई सदस्य और रक्षा प्रतिष्ठान के शीर्ष अधिकारी मारे गए बताए गए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।
इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए मिडिल ईस्ट के कई इलाकों को निशाना बनाया। वहीं इज़रायल की ओर से भी भीषण हवाई हमले जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के 130 से अधिक शहरों में बमबारी की गई है। अब तक 555 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों घायल हैं।