'खून दो, तभी मिलेगी डिग्री!', फुटबॉल कोच की हैवानियत ने पार की हदें, छात्रों से जबरन करवाया गया रक्तदान

जुएशन की डिग्री और उससे जुड़ी शैक्षणिक क्रेडिट्स पाने के लिए आमतौर पर छात्रों को कई असाइनमेंट, प्रोजेक्ट और परीक्षा से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन ताइवान में जो सामने आया है, वो पढ़ाई से कहीं ज़्यादा इंसानियत को झकझोर देने वाली कहानी बन चुकी है। क्या कोई शिक्षक इतना निर्दयी हो सकता है? यह सवाल हर उस इंसान के मन में उठेगा जो इस खबर को पढ़ेगा।

हाल ही में ताइवान के कुछ छात्रों ने जो दिल दहला देने वाला खुलासा किया है, उसने शिक्षा की दुनिया को शर्मसार कर दिया है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी की महिला फुटबॉल कोच पर छात्रों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कथित तौर पर, यह कोच अपने छात्रों को शैक्षणिक क्रेडिट देने के बदले बार-बार जबरन रक्तदान के लिए मजबूर करती थी। सोचिए, जिन हाथों से बच्चों का भविष्य संवरना था, वो हाथ उनके शरीर से खून निकालने में लगे थे।

छात्राओं ने बताया कि कभी-कभी तो एक ही दिन में तीन बार उनका खून लिया जाता था। ये पढ़ाई नहीं, शारीरिक और मानसिक शोषण की इंतहा थी।

कोच की करतूत सामने लाने का साहस एक छात्रा ने किया

यह खौफनाक कहानी तब सामने आई जब नेशनल ताइवान नॉर्मल यूनिवर्सिटी (NTNU) की एक साहसी छात्रा, जियान, ने सार्वजनिक तौर पर 61 वर्षीय कोच झोउ ताई-यिंग पर आरोप लगाए। झोउ ताई-यिंग कोई आम कोच नहीं, ताइवान के फुटबॉल जगत की एक जानी-मानी हस्ती हैं। लेकिन इस शख्सियत के पीछे छुपा हैवान चेहरा तब उजागर हुआ, जब छात्रा ने बताया कि उसे 200 बार तक रक्तदान के लिए मजबूर किया गया — वो भी सिर्फ इसलिए कि उसे अपनी डिग्री मिल सके।

14 दिन तक लगातार खून, हर दिन तीन बार!

जियान ने कहा कि ब्लड डोनेशन यूनिवर्सिटी के क्रेडिट सिस्टम का हिस्सा बना दिया गया था। 32 क्रेडिट्स पाने के लिए उसने जो कीमत चुकाई, वह किसी भी इंसान को भीतर से तोड़ सकती है। अगर हम मना करते तो हमें या तो यूनिवर्सिटी से निकालने की धमकी दी जाती या डिग्री देने से इनकार किया जाता, उसने बताया।

यही नहीं, जियान ने बताया कि उससे लगातार 14 दिन तक खून लिया गया — हर दिन तीन बार। वह कहती है, सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक मेरा शरीर एक मशीन बन चुका था — खून निकालने की मशीन।

छात्रा की बात सुन आप भी दंग रह जाएंगे

अपना दर्द साझा करते हुए जियान ने कहा, मैं क्रेडिट के लिए सब कुछ झेल रही थी। आठवें दिन जब फिर से खून लिया जा रहा था, तो मेरी नसों में सूइयों की जगह ही नहीं बची थी। उसकी आंखों में डर था, लेकिन अब गुस्सा भी है।

जियान के सामने आने के बाद अब कई और छात्र-छात्राओं ने भी साहस जुटाया है और कोच के खिलाफ सामने आए हैं। एक छात्रा ने कहा, अब जब पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है, कैसे हम इतने लंबे समय तक चुप रह गए। यह सब सोचकर घिन आती है।

कोच को हटाया गया, पर क्या इतना काफी है?

इस हंगामे के बाद यूनिवर्सिटी ने आखिरकार 13 जुलाई को कार्रवाई की और झोउ को कोच के पद से बर्खास्त कर दिया। अब उन्हें भविष्य में किसी भी टीम का नेतृत्व करने से भी रोक दिया गया है। यूनिवर्सिटी ने उनका माफीनामा भी सार्वजनिक किया जिसमें उन्होंने अपने किए पर माफी मांगी, हालांकि बाद में इसे हटा लिया गया।