सऊदी अरब ने ऊंटों के लिए ‘कैमल पासपोर्ट’ लॉन्च करने की योजना घोषित की है। पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय (MEWA) के इस कदम का उद्देश्य ऊंटों के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व को मान्यता देना है। साथ ही, देश में लगभग 2.2 मिलियन ऊंटों की आबादी का बेहतर प्रबंधन और एक विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना भी इस पहल का लक्ष्य है।
मंत्री मंसूर अल-मुशैती ने किया उद्घाटनइस परियोजना का उद्घाटन उप मंत्री मंसूर अल-मुशैती ने किया। यह पहल ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर द डेवलपमेंट ऑफ द लाइवस्टॉक एंड फिशरीज सेक्टर’ का हिस्सा है। मंत्रालय द्वारा साझा की गई तस्वीरों में हरे रंग के पासपोर्ट को दिखाया गया है, जिस पर सोने में बना ऊंट और सऊदी अरब का राष्ट्रीय चिह्न अंकित है।
ऊंट पासपोर्ट में क्या-क्या शामिल होगासरकारी चैनल अल इखबरिया के अनुसार, यह पासपोर्ट ऊंटों की खरीद-फरोख्त और परिवहन को नियंत्रित करने, मालिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मालिकाना हक साबित करने में मदद करेगा। पासपोर्ट में निम्नलिखित जानकारी दर्ज होगी:
माइक्रोचिप नंबर
पासपोर्ट नंबर
ऊंट का नाम
जन्म तिथि
नस्ल (Breed)
लिंग
रंग
जन्म स्थान
जारी करने की तारीख और स्थान
ऊंट की दोनों तरफ की तस्वीरें (पहचान के लिए)
वैक्सीनेशन रिकॉर्ड (पशु चिकित्सक के नाम, हस्ताक्षर और मुहर सहित)
ऊंट का सामाजिक और आर्थिक महत्वअरब प्रायद्वीप में सदियों से ऊंट परिवहन का मुख्य साधन रहे हैं और इन्हें धन व सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक भी माना जाता रहा है। आज भी ऊंट ट्रेडिंग उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सालाना ऊंट प्रतियोगिताओं और मेलों में इन जानवरों का कारोबार लाखों डॉलर तक होता है।
सऊदी में मिलीं हजारों साल पुरानी ऊंट नक्काशियांसरकार ने हाल के वर्षों में ऊंटों पर होने वाली अवैध कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं (जैसे होंठ या कूबड़ में बदलाव) पर सख्ती बढ़ा दी है, ताकि इनकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ावा मिले। 2021 की रिसर्च के अनुसार, सऊदी अरब में मिली प्राचीन ऊंट नक्काशियां लगभग 7,000 साल पुरानी हैं, जो इस जानवर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती हैं। अनुमान है कि देश में लगभग 80,000 ऊंट मालिक हैं।
‘कैमल पासपोर्ट’ पहल सऊदी विजन 2030 के तहत पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।