खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडर ही क्यों होता है सबसे ज्यादा इस्तेमाल? दूसरी गैसें क्यों नहीं बन पातीं बेहतर विकल्प

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। इसी कारण भारत में एलपीजी की उपलब्धता और सप्लाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस परिस्थिति ने आम लोगों के मन में एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा कर दिया है—आखिर घरों में खाना पकाने के लिए ज्यादातर एलपीजी सिलेंडर का ही उपयोग क्यों किया जाता है? क्या दूसरी गैसें इस काम के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकतीं? इस सवाल के पीछे कई वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण छिपे हुए हैं।

दरअसल, एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे अपेक्षाकृत कम दबाव में तरल रूप में बदला जा सकता है। जब गैस लिक्विड रूप में आ जाती है तो उसे कम जगह में बड़ी मात्रा में स्टोर करना आसान हो जाता है। यही कारण है कि इसे स्टील के कॉम्पैक्ट सिलेंडरों में सुरक्षित रूप से भरकर घरों तक पहुंचाया जा सकता है। इन सिलेंडरों का आकार और वजन भी ऐसा होता है कि उन्हें ट्रकों के जरिए आसानी से ढोया जा सके और घरों में भी संभालना सुविधाजनक हो।

एलपीजी को लगभग 5 से 10 बार के दबाव पर ही तरल बनाया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि इसे स्टोर करने के लिए अत्यधिक भारी या बहुत मजबूत कंटेनर की आवश्यकता नहीं होती। एक साधारण स्टील सिलेंडर में ही पर्याप्त मात्रा में एलपीजी सुरक्षित तरीके से रखी जा सकती है। यही सुविधा इसे घरेलू रसोई के लिए सबसे उपयुक्त ईंधन बनाती है।

इसके विपरीत अगर कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की बात करें, तो इसे तरल रूप में बदलना इतना आसान नहीं होता। इसे स्टोर करने के लिए लगभग 200 से 250 बार तक का बहुत अधिक दबाव चाहिए होता है। इतना अधिक प्रेशर सहने के लिए सिलेंडर को काफी मोटा और भारी बनाना पड़ता है। ऐसे सिलेंडर घरों में रखना या किचन में उपयोग करना न तो सुरक्षित होता है और न ही व्यावहारिक।
एलपीजी की लोकप्रियता का एक और महत्वपूर्ण कारण इसकी ऊंची कैलोरीफिक वैल्यू है। इसका अर्थ यह है कि जब एलपीजी जलती है तो यह अधिक मात्रा में गर्मी पैदा करती है। मीथेन या सीएनजी जैसी गैसों की तुलना में एलपीजी लगभग ढाई गुना तक ज्यादा गर्मी उत्पन्न कर सकती है। यही वजह है कि इससे खाना जल्दी पकता है और कम ईंधन में ज्यादा काम हो जाता है।

सुरक्षा के लिहाज से भी एलपीजी को घरेलू उपयोग के लिए बेहतर माना जाता है। यह गैस हवा से थोड़ी भारी होती है, इसलिए यदि कहीं रिसाव हो जाए तो गैस नीचे की ओर जमा हो जाती है और उसकी गंध के कारण लीक का पता जल्दी चल सकता है। इसके उलट सीएनजी जैसी गैसें हवा से हल्की होती हैं और लीक होने पर तेजी से वातावरण में फैल जाती हैं। ऐसे में बंद जगहों में उनका पता लगाना कठिन हो सकता है।

कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि हाइड्रोजन जैसी गैस का उपयोग क्यों नहीं किया जाता, क्योंकि वह भी अच्छी तरह जलती है। हालांकि हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील और विस्फोटक होती है। इसे सुरक्षित तरीके से स्टोर करना और नियंत्रित वातावरण में इस्तेमाल करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ यह बहुत तेजी से प्रतिक्रिया कर सकती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

इन सभी कारणों—कम दबाव में स्टोरेज, ज्यादा गर्मी पैदा करने की क्षमता, आसान ट्रांसपोर्टेशन और अपेक्षाकृत बेहतर सुरक्षा—की वजह से एलपीजी आज भी घरेलू रसोई के लिए सबसे भरोसेमंद और व्यावहारिक ईंधन मानी जाती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलेंडर का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है।