अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान एक बार फिर चर्चा में है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ड्रोन हमले और उसमें अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ट्रंप ने संकेत दिया है कि जमीनी सेना की तैनाती फिलहाल टाली जा सकती है।
न्यूजनेशन की पत्रकार केली मेयर को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले का जवाब जल्द दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका अपने नागरिकों और सैनिकों की मौत का बदला लेने में देर नहीं करेगा। जानकारी के अनुसार, सोमवार तक इस टकराव में छह अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं।
पहले बयान से अलग दिखा रुखट्रंप का ताजा बयान उनके पूर्व दावों से कुछ अलग नजर आता है। ईरान पर शनिवार को की गई कार्रवाई के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में कहा था कि अधिकतर राष्ट्रपति कहते हैं कि वे जमीनी सैनिक नहीं भेजेंगे, लेकिन वे ऐसा वादा नहीं करते। हालांकि अब उन्होंने कहा है कि संभवतः जमीनी सैनिकों की जरूरत ही न पड़े। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
संघर्ष का दायरा हुआ व्यापकसोमवार को हालात और गंभीर हो गए जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच टकराव तेज हो गया। तेहरान समर्थित मिलिशिया भी इस संघर्ष में कूद पड़ीं, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में हिंसा का दायरा फैल गया।
ईरान ने इजरायल के साथ-साथ कुछ अरब देशों की ओर भी मिसाइलें दागीं। वहीं लेबनान से हिज्बुल्ला ने रॉकेट और ड्रोन हमलों के जरिए इजरायल को निशाना बनाया। जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों और दक्षिण लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है। इजरायल ने संकेत दिया है कि यह लड़ाई लंबी चल सकती है।
खामनेई की मौत के बाद बढ़ा तनावइस टकराव की तीव्रता उस समय और बढ़ गई जब अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के मारे जाने की खबर सामने आई। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अभियान शुरू होने के बाद से सैकड़ों लोग जान गंवा चुके हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक 131 शहरों में कम से कम 555 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
बातचीत से इंकारयुद्ध के बीच तेहरान ने अपने रुख को और सख्त कर लिया है। वरिष्ठ नेता अली लारीजानी ने स्पष्ट किया कि भले ही वॉशिंगटन बातचीत की इच्छा जता रहा हो, लेकिन ईरान फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की वार्ता के लिए तैयार नहीं है। इससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं और कमजोर होती दिख रही हैं।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असरइस संघर्ष का असर अब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। ईरानी ड्रोन ने सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया, जहां प्रतिदिन पांच लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का प्रसंस्करण होता है। हमले के कारण कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ।
इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों और धमकियों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, रियाद हमले के बाद ट्रंप का बदला रुख, ईरान का सख्त बयान और क्षेत्रीय संघर्ष का फैलाव इस संकट को और जटिल बना रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या हालात कूटनीति की ओर मुड़ते हैं या टकराव और तेज होता है।