रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और एशियाई देशों के साथ रूस के संबंधों पर खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण और बड़ा देश बताते हुए कहा कि उसके दुनिया के विभिन्न देशों के साथ व्यापक और बहुआयामी रिश्ते हैं। हालांकि बातचीत के दौरान उन्होंने भारत की भी जमकर सराहना की और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के दौरान दुनिया भर से पहुंचे पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पुतिन ने भारत, चीन, अमेरिका, रूस और पाकिस्तान समेत कई देशों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत लगातार आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत हो रहा है और इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही नीतियों और प्रयासों की बड़ी भूमिका है।
भारत की प्रगति का किया उल्लेखरूसी राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया भारत की आर्थिक उपलब्धियों को साफ तौर पर देख रही है। उनके अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जिस गति से विकास किया है, उसने उसे वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावशाली बना दिया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और आने वाले समय में उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।
पुतिन ने यह भी संकेत दिया कि रूस भारत को अपने सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक मानता है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि रूस भारत के साथ अपने संबंधों को विशेष महत्व देता है।
पाकिस्तान पर सवाल के जवाब में क्या बोले पुतिनफोरम के दौरान एक भारतीय पत्रकार ने रूस और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर सवाल पूछा। पत्रकार ने यह जानना चाहा कि रूस के चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ अच्छे रिश्ते हैं, ऐसे में क्या रूस यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के रणनीतिक और रक्षा हितों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
इस सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा कि रूस दक्षिण एशिया की जटिल परिस्थितियों और भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूद संवेदनशील मुद्दों को अच्छी तरह समझता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय हालात और सीमाओं से जुड़े विवादों की जानकारी रूस को है और वह इन विषयों को गंभीरता से देखता है।
'पाकिस्तान केवल चीन पर निर्भर नहीं'राष्ट्रपति पुतिन ने इस धारणा को भी खारिज किया कि पाकिस्तान पूरी तरह चीन के प्रभाव में है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक बड़ा और महत्वपूर्ण देश है, जिसके अनेक देशों के साथ अलग-अलग स्तर पर संबंध हैं।
उन्होंने कहा कि यह सही है कि पाकिस्तान के लिए चीन के साथ संबंध बेहद अहम हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी विदेश नीति केवल एक देश तक सीमित है। पुतिन के अनुसार पाकिस्तान विभिन्न देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध बनाए हुए है और उसे केवल किसी एक शक्ति के प्रभाव में देखना उचित नहीं होगा।
चीन की वैश्विक भूमिका पर भी की टिप्पणीरूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अधिकांश देश चीन के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे चीन की विशाल अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार में उसकी प्रमुख भूमिका है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों के लिए चीन के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। यही कारण है कि एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों के देश भी बीजिंग के साथ अपने संबंधों को लगातार विस्तार दे रहे हैं।
भारत को बताया दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाबातचीत के दौरान पुतिन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने बताया कि आर्थिक आकार के आधार पर भारत लगातार आगे बढ़ रहा है और वैश्विक आर्थिक संतुलन में उसकी हिस्सेदारी बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि रूस चौथे स्थान पर है, जबकि अमेरिका और चीन भी शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। पुतिन के अनुसार इन देशों की आर्थिक ताकत ने जापान और कई यूरोपीय देशों को पीछे छोड़ दिया है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में एशियाई देशों की आर्थिक भूमिका और अधिक प्रभावशाली होने वाली है।
भारत-चीन संबंधों पर संतुलित रुखराष्ट्रपति पुतिन ने भारत और चीन के रिश्तों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध बेहद जटिल, संवेदनशील और बहुआयामी हैं। ऐसे मामलों में किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि रूस भारत और चीन दोनों को अपना मित्र मानता है और दोनों देशों के साथ लगातार संवाद बनाए रखता है। रूस की कोशिश हमेशा यही रहती है कि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा मिले तथा विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकले।
भारत पर दबाव की कोशिशों को बताया नुकसानदायकपुतिन ने अमेरिका और भारत के संबंधों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कुछ मौकों पर अमेरिका ने रूस के साथ सहयोग के मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है।
हालांकि उनके अनुसार अब दुनिया यह समझने लगी है कि भारत जैसे बड़े और स्वतंत्र निर्णय लेने वाले देश पर दबाव बनाना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत पर किसी प्रकार का बाहरी दबाव डालने की कोशिश अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय सहयोग के लिए लाभदायक नहीं मानी जा सकती।
रूसी राष्ट्रपति के इन बयानों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं और एशिया की प्रमुख शक्तियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रही हैं। भारत, रूस, चीन और पाकिस्तान से जुड़े उनके विचारों ने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति और आर्थिक संतुलन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।