राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, धार्मिक समिति का हुआ पुनर्गठन; गोविंद देव गिरी बने अध्यक्ष, 7 सदस्यीय पैनल में अयोध्या के 5 संत शामिल

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की रामनगरी अयोध्या में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में मंदिर के प्रशासनिक और धार्मिक संचालन से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में ट्रस्ट की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी क्रम में ट्रस्ट की धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष के रूप में गोविंद देव गिरी को जिम्मेदारी सौंपी गई। साथ ही मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।

7 सदस्यीय धार्मिक समिति का हुआ गठन

बैठक में गठित नई धार्मिक समिति में अध्यक्ष गोविंद देव गिरी के अलावा वासुदेवानंद सरस्वती, विश्वप्रसन्नतीर्थ, दिनेन्द्र दास, कमलनयन दास, राजकुमार दास, रामानंद दास और मिथिलेश नंदनी शरण को शामिल किया गया है। समिति के सात सदस्यों में से पांच संत अयोध्या से जुड़े हैं। इस समिति का उद्देश्य मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, परंपराओं और आध्यात्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करना होगा।

बैठक में यह भी तय किया गया कि ट्रस्ट की ओर से अब एक आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त किया जाएगा, जो मीडिया और सार्वजनिक संवाद से जुड़े विषयों को संभालेगा। वहीं, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन पर फिलहाल फैसला टाल दिया गया है और इस पद पर नियुक्ति अगले एक महीने के भीतर किए जाने की संभावना जताई गई है।
प्रशासनिक सुधारों पर भी हुआ मंथन

करीब ढाई घंटे तक चली बैठक में मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा हुई। ट्रस्ट ने तय किया कि मंदिर का संचालन सभी पदाधिकारियों और संतों के सामूहिक नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा मंदिर में सेवा देने वाले अर्चकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया, ताकि धार्मिक अनुष्ठानों की गुणवत्ता और परंपराओं का बेहतर ढंग से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि नए महासचिव की नियुक्ति होने तक कृष्ण मोहन कार्यवाहक महासचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। ट्रस्ट की अगली बैठक 2 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें नए महासचिव और सीईओ के नामों की घोषणा की जा सकती है।

चढ़ावा विवाद के बीच हुई अहम बैठक

हाल के दिनों में चढ़ावे से जुड़े विवादों के बीच बुधवार दोपहर तीन बजे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की विशेष बैठक शुरू हुई। इस बैठक में नए महासचिव की नियुक्ति, ट्रस्ट में रिक्त पड़े तीन ट्रस्टी पदों को भरने और पहली बार नियुक्त किए जाने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

विशेष बैठक के बाद ट्रस्ट की नियमित बैठक अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास मणिराम छावनी में आयोजित की गई, जहां विभिन्न प्रशासनिक और संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा जारी रही।

सीईओ चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में

ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए 18 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित किए थे। सूत्रों के अनुसार, इस पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि करीब 2,500 से 5,500 आवेदन ट्रस्ट को मिले हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर आवेदन संख्या की पुष्टि नहीं की गई है।

ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि देशभर से इस पद के लिए उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। कई सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी पेशेवरों ने भी आवेदन किया है। इससे स्पष्ट है कि इस पद को लेकर व्यापक रुचि देखने को मिली है।

विशेषज्ञ समिति करेगी अंतिम चयन की सिफारिश


सीईओ पद के लिए प्राप्त सभी आवेदनों की जांच और मूल्यांकन का जिम्मा एक विशेषज्ञ समिति को सौंपा गया है। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और एनआईटी रायपुर के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं। समिति योग्य उम्मीदवारों का चयन कर अपनी सिफारिश ट्रस्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर अंतिम नियुक्ति की जाएगी।

ट्रस्ट का मानना है कि सीईओ की नियुक्ति से वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूती मिलेगी। साथ ही मंदिर के दैनिक संचालन को अधिक व्यवस्थित, आधुनिक और प्रभावी ढंग से संचालित करने में भी सहायता मिलेगी। यही कारण है कि इस नियुक्ति को ट्रस्ट के व्यापक प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।