प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर इजरायल रवाना हो रहे हैं। बीते नौ वर्षों में यह उनका दूसरा इजरायल दौरा होगा। पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनीतिक हालात, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी के बीच हो रही यह यात्रा कई मायनों में अहम मानी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ रक्षा, व्यापार और तकनीकी साझेदारी को और मजबूती प्रदान करेगा।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच लगभग 71 हजार करोड़ रुपये के संभावित रक्षा सौदों पर चर्चा होने की संभावना है। रक्षा सहयोग लंबे समय से भारत-इजरायल संबंधों की धुरी रहा है और इस बार भी सुरक्षा साझेदारी प्रमुख एजेंडे में शामिल है। प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में उन्नत हथियार प्रणालियों, निगरानी तकनीक और संयुक्त अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इजरायल की संसद, यानी Knesset, को संबोधित करना प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके अलावा, वह इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और रक्षा निर्माण में संयुक्त पहल जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा। प्रधानमंत्री की मुलाकात इजरायल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से भी तय है, जिसमें दोनों देश साझा चुनौतियों और वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में बुधवार रात एक निजी रात्रिभोज का आयोजन किया जाएगा। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में इस यात्रा को लेकर उत्साह व्यक्त किया और भारत-इजरायल मित्रता को विशेष बताया। कूटनीतिक हलकों में इसे दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
इस बीच, भारत और इजरायल के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर भी प्रगति की संभावना जताई जा रही है। इस विषय पर चार दिवसीय वार्ता जारी है, जो 26 फरवरी को समाप्त होगी। यदि इस दिशा में सहमति बनती है तो कृषि, तकनीक, रक्षा उत्पादन और स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के गहरे और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों की पुनर्पुष्टि करेगी। साथ ही यह साझा दृष्टिकोण के आधार पर सहयोग के नए आयाम तलाशने और मौजूदा साझेदारी को और व्यापक बनाने का अवसर भी प्रदान करेगी।
रक्षा क्षेत्र में विशेष रूप से वायु सुरक्षा प्रणालियों को लेकर चर्चा अहम रहने वाली है। भारत अपनी स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ के विकास पर कार्य कर रहा है। इसी संदर्भ में इजरायल की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली Iron Dome के कुछ तकनीकी तत्वों को शामिल करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। यदि इस दिशा में सहयोग बढ़ता है, तो भारत की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को नई मजबूती मिल सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी की पहली इजरायल यात्रा जुलाई 2017 में हुई थी, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया। उसके बाद जनवरी 2018 में नेतन्याहू भारत आए थे, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा का संचार हुआ। मौजूदा दौरे को उसी कड़ी का विस्तार माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत-इजरायल सहयोग को और गहराई दे सकता है।