‘शांतिदूत’ बनने निकले पाकिस्तान को ईरान का झटका! कराची जा रहे जहाज को होर्मुज से वापस भेजा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच खुद को ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश कर रहे पाकिस्तान को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब ईरान ने कराची की ओर जा रहे एक जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने से रोक दिया। एक तरफ पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर ईरानी सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई ने उसके प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि जिस जहाज को रोका गया, उसमें खाद्य सामग्री लदी हुई थी।

मिली जानकारी के अनुसार SELEN नाम का यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह से रवाना हुआ था और उस पर सेंट किट्स एंड नेविस का झंडा लगा हुआ था। यह जहाज फारस की खाड़ी से होते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर पाकिस्तान के कराची बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था। हालांकि, रास्ते में ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने उसे रोक लिया और आवश्यक अनुमति न होने का हवाला देते हुए उसे वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया।

इस कार्रवाई को लेकर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी ने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित जहाज ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था। उनके मुताबिक, जहाज के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए जरूरी दस्तावेज और आधिकारिक मंजूरी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की समुद्री सीमा से गुजरने के लिए उसकी अथॉरिटी की अनुमति अनिवार्य है।
दरअसल, अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण बढ़ा दिया है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। मौजूदा हालात में कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि, ईरान ने यह भी कहा है कि वह केवल अपने विरोधी देशों या उनके सहयोगियों के जहाजों पर ही सख्ती बरत रहा है।

ऐसे में पाकिस्तान के जहाज को रोका जाना इसलिए भी हैरान करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से अच्छे संबंध रहे हैं। इन्हीं संबंधों के आधार पर पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में इस्लामाबाद में वार्ता की मेजबानी का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन इस बीच हुई यह घटना उसके प्रयासों को कमजोर करती नजर आ रही है।

इसके अलावा, होर्मुज मार्ग पर बढ़ते प्रतिबंधों का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से पहले से ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे देश की स्थिति और गंभीर हो सकती है। साथ ही, अफगानिस्तान के साथ चल रहे तनाव और ईंधन संकट ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिससे यह पूरा घटनाक्रम उसके लिए एक नई चिंता का कारण बन गया है।