मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, 10 मरीजों की मौत की आशंका; 20 को सुरक्षित निकाला गया

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में गुरुवार तड़के एक निजी अस्पताल में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। शहर के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल की आईसीयू यूनिट में अचानक आग भड़कने से कई मरीज उसकी चपेट में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में 10 लोगों के जान गंवाने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि जिला प्रशासन ने फिलहाल चार मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि मृतकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। हादसे के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दमकल विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान में जुटे रहे। अब तक लगभग 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक आग अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थित आईसीयू में लगी, जहां गंभीर हालत वाले मरीजों का इलाज चल रहा था। जिला प्रशासन के अनुसार मृतक मरीज पिछले कई दिनों से आईसीयू में भर्ती थे। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। घटना सुबह करीब 3:20 बजे हुई, उस समय आईसीयू में एक दर्जन से अधिक मरीज मौजूद थे। आग और धुएं से प्रभावित अन्य मरीजों को तत्काल आसपास के विभिन्न अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक परिजन का आरोप है कि हादसे के समय आईसीयू में कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था। जैसे ही धुआं फैलना शुरू हुआ, मरीजों और उनके परिजनों ने खुद ही लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। उनका कहना है कि शुरुआती समय में आग बुझाने के लिए कोई अस्पताल कर्मचारी नजर नहीं आया। देखते ही देखते पूरा आईसीयू धुएं से भर गया, जिससे मरीजों में दहशत फैल गई। लोग मदद के लिए चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन समय पर राहत नहीं मिल सकी। आग की खबर फैलते ही अस्पताल की अन्य मंजिलों पर मौजूद लोग भी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों का यह भी दावा है कि कई अस्पताल कर्मी मरीजों की सहायता करने के बजाय स्वयं को सुरक्षित निकालने में व्यस्त दिखे। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आरोप है कि आग लगने के दौरान अस्पताल में स्थापित फायर हाइड्रेंट प्रणाली भी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकी, जिसके कारण हालात और अधिक बिगड़ गए। प्रशासन को आशंका है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, नुकसान और हताहतों का वास्तविक आंकड़ा सामने आ सकता है।

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि चौथी मंजिल स्थित आईसीयू में लगभग 15 मरीज भर्ती थे, जिनमें से कई आग और धुएं से प्रभावित हुए हैं। घायलों को शहर के अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन हादसे के प्रत्येक पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रहा है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार तड़के करीब तीन बजे आईसीयू से अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वेंटिलेटर और अन्य चिकित्सा उपकरणों में आग लग गई। कुछ ही मिनटों में लपटों ने पूरे क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में ले लिया और अस्पताल में भगदड़ मच गई। मरीजों और उनके परिजनों में जान बचाने की होड़ लग गई। सूचना मिलने पर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आग काफी नुकसान पहुंचा चुकी थी। घटना से आक्रोशित मृतकों के परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अस्पताल परिसर को सील कर दिया गया है। आग इतनी भयावह थी कि कई घंटों बाद भी परिसर में जले हुए उपकरणों और धुएं की तेज गंध महसूस की जा रही थी।