न्यूक्लियर एनर्जी से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स तक... भारत-अमेरिका ट्रेड डील से पहले जयशंकर-रूबियो की अहम बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर अंतिम मुहर लगने से पहले दोनों देशों के शीर्ष कूटनीतिक चेहरों की वॉशिंगटन में मुलाकात ने वैश्विक राजनीति का ध्यान खींचा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई इस बैठक में द्विपक्षीय रिश्तों के कई रणनीतिक पहलुओं पर गहन चर्चा हुई, जिसमें परमाणु ऊर्जा से लेकर रेयर और क्रिटिकल मिनरल्स तक के मुद्दे शामिल रहे।

सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात का एक प्रमुख एजेंडा रेयर मिनरल्स की खोज, उनकी माइनिंग और प्रोसेसिंग को लेकर भारत-अमेरिका सहयोग को औपचारिक रूप देना था। बदलते वैश्विक हालात और सप्लाई चेन की अस्थिरता के बीच इन मिनरल्स को लेकर सहयोग को दोनों देशों ने भविष्य की रणनीतिक जरूरत बताया।

रणनीतिक साझेदारी के हर आयाम पर मंथन

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बातचीत केवल व्यापार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु सहयोग, रक्षा साझेदारी, अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज संसाधन और एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ने साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न द्विपक्षीय मैकेनिज्म की जल्द बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई है।

जयशंकर के अनुसार, दोनों देशों का फोकस केवल मौजूदा समझौतों पर नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर है।

मोदी-ट्रंप समझौते का किया गया स्वागत

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि विदेश मंत्री रूबियो और जयशंकर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का खुले तौर पर स्वागत किया। बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच नए आर्थिक अवसरों के द्वार खोल सकता है।

बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि लोकतांत्रिक मूल्य साझा करने वाले देशों का एकजुट होकर काम करना न केवल व्यापार बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

क्वाड और इंडो-पैसिफिक पर साझा रुख

बैठक के समापन पर रूबियो और जयशंकर ने क्वाड (QUAD) के मंच के जरिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने माना कि एक समृद्ध, स्थिर और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र उनके साझा रणनीतिक हितों की बुनियाद है।

अमेरिकी बयान में यह भी कहा गया कि भारत-अमेरिका साझेदारी केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्रीय और वैश्विक संतुलन पर पड़ता है।

हालिया महीनों में रिश्तों में आया था तनाव

गौरतलब है कि बीते नौ से दस महीनों के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधों में कुछ तल्खी देखने को मिली थी। इसका मुख्य कारण व्यापार वार्ताओं में ठहराव और अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाया गया ऊंचा टैरिफ रहा, जो कुछ मामलों में 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।

इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन द्वारा पाकिस्तान को वॉशिंगटन में तरजीह दिए जाने और भारत की आपत्तियों के बावजूद भारत-पाकिस्तान युद्ध समाप्त कराने को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के बार-बार किए गए दावों ने नई दिल्ली में असहजता पैदा की थी।

पाकिस्तान को न बुलाना: एक अहम संकेत

हालांकि हालिया घटनाक्रम में एक अहम संकेत भी सामने आया है। अमेरिका के नेतृत्व में होने वाली क्रिटिकल मिनरल्स पर उच्चस्तरीय बैठक में पाकिस्तान को आमंत्रित नहीं किया गया है। इसे कूटनीतिक हलकों में भारत की संवेदनशीलताओं को सम्मान देने और रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।