UN में नेतन्याहू का ईरान पर बड़ा दावा, बोले- जल्द सत्ता के खिलाफ उठ खड़ी होगी जनता

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान में मौजूदा शासन के खिलाफ एक दिन जनता खड़ी होगी और यह दिन बहुत दूर नहीं हो सकता। नेतन्याहू ने ईरान की सरकार पर झूठ, भ्रष्टाचार और दमन का आरोप लगाते हुए कहा कि अंततः यह शासन खत्म हो जाएगा। उनके भाषण के दौरान बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए, जिसके बाद नेतन्याहू ने विरोध करने वाले प्रतिनिधियों पर भी तीखी टिप्पणी की।

‘ईरान में एक दिन कुछ अविश्वसनीय होगा’

नेतन्याहू ने अपने भाषण में कहा कि ईरान में शायद बहुत जल्द ऐसा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसकी कल्पना करना अभी मुश्किल है। उनके मुताबिक, ईरान के लोग अपने शासन के खिलाफ उठ खड़े होंगे और वहां सत्ता में बड़ा बदलाव आएगा।

इजरायली प्रधानमंत्री ने ईरान की सरकार पर अपने ही नागरिकों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप लगाया। उन्होंने उन प्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाया जो उनके भाषण का विरोध करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल से बाहर चले गए। नेतन्याहू ने पूछा कि जब उनके दावे के अनुसार ईरान में बड़ी संख्या में निहत्थे नागरिकों को मारा और घायल किया जा रहा था, तब ये लोग कहां थे।

ईरान में शासन परिवर्तन को लेकर नेतन्याहू की यह टिप्पणी उनके भाषण के प्रमुख हिस्सों में रही। उन्होंने इसे ईरान के लोगों की ओर से आने वाले संभावित बदलाव के रूप में पेश किया, लेकिन यह उनका राजनीतिक दावा है, न कि कोई स्थापित या घोषित घटनाक्रम।

भाषण शुरू होते ही कई प्रतिनिधि बाहर निकले


नेतन्याहू के UNGA भाषण के दौरान कक्ष में विरोध का दृश्य भी देखने को मिला। कई देशों के प्रतिनिधि उनके बोलने के समय बाहर चले गए। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, दर्जनों प्रतिनिधियों ने ऐसा किया। कुछ प्रतिनिधियों के बाहर जाने के बीच नेतन्याहू ने उन्हें ‘मोरल काउर्ड्स’ यानी ‘नैतिक रूप से कायर’ कहा।

उन्होंने विरोध करने वालों को ‘दिखावटी मानवाधिकार समर्थक’ बताते हुए सवाल किया कि ईरान में नागरिकों के खिलाफ कथित कार्रवाई के समय उनकी आवाज कहां थी। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष को व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा, जबकि इजरायली प्रतिनिधिमंडल और समर्थकों की ओर से नेतन्याहू के भाषण का समर्थन किया गया।
ट्रंप की तारीफ, बोले- इजरायल का उनसे बड़ा साझेदार नहीं

नेतन्याहू ने अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ईरान और अन्य विरोधी ताकतों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई में ट्रंप से बड़ा साझेदार उनके लिए कोई नहीं रहा।

उन्होंने ट्रंप के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल ने जिन खतरों का सामना किया, उनका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं था। नेतन्याहू ने अपनी सैन्य कार्रवाइयों को व्यापक सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि इजरायल और अमेरिका ने केवल अपनी सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि ‘सभ्यता को बचाने’ के लिए भी कार्रवाई की।

ईरान को लेकर ट्रंप ने भी इस सप्ताह UNGA में अपने भाषण के दौरान कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने ईरान के साथ भविष्य में समझौते की संभावना का जिक्र करने के साथ यह भी कहा था कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई कर सकता है।

ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले को बताया आसान फैसला

नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर इजरायल की सैन्य कार्रवाई का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि इन ठिकानों को निशाना बनाना बेहद मुश्किल था, लेकिन प्रधानमंत्री के तौर पर उनके लिए यह सबसे आसान फैसलों में से एक था।

उनके मुताबिक, अगर इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने की कार्रवाई नहीं की होती तो इजरायल के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि कुछ देशों के नेता सार्वजनिक तौर पर इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हैं, जबकि निजी तौर पर वे इसकी सराहना करते हैं।

नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई से उन देशों की सुरक्षा में भी मदद हुई, जिनके प्रतिनिधि उनके भाषण के दौरान हॉल से बाहर चले गए थे। उन्होंने इस स्थिति को पाखंड बताया।

‘इजरायल पिछले तीन साल से सात मोर्चों पर लड़ रहा’

नेतन्याहू ने अपने भाषण में इजरायल के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से इजरायल एक साथ सात अलग-अलग मोर्चों पर लड़ रहा है।

उन्होंने इन मोर्चों में हमास, हिजबुल्लाह, हूती, ईरान, इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया, सीरिया में ईरान समर्थित मिलिशिया और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी सशस्त्र समूहों का नाम लिया।

नेतन्याहू ने कहा कि इन सभी मोर्चों से एक साथ इजरायल पर दबाव बनाया गया और उनके अनुसार इन ताकतों का लक्ष्य इजरायल को खत्म करना है। उन्होंने इजरायली सैनिकों के लंबे समय से लगातार लड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि इतने छोटे देश के लिए एक साथ सात मोर्चों पर युद्ध करना असाधारण स्थिति है।

‘सात मोर्चों की लड़ाई’ का जिक्र करते हुए नेतन्याहू ने सवाल किया कि क्या न्यू जर्सी के लगभग आकार के किसी दूसरे देश के लिए एक साथ इतने मोर्चों पर युद्ध करना संभव है।

भाषण में ईरान सबसे प्रमुख मुद्दों में रहा

नेतन्याहू के भाषण में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, ईरानी शासन और इजरायल की सैन्य कार्रवाई प्रमुख मुद्दे रहे। उन्होंने एक ओर ईरान में संभावित राजनीतिक बदलाव का दावा किया, वहीं दूसरी ओर इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई को सुरक्षा की जरूरत बताया।

उनके भाषण के दौरान हुए विरोध ने भी ध्यान खींचा। कई प्रतिनिधियों के हॉल से बाहर जाने के बावजूद नेतन्याहू ने अपना संबोधन जारी रखा और विरोध करने वाले देशों तथा प्रतिनिधियों को सीधे निशाने पर लिया। उनके भाषण में ईरान के साथ-साथ इजरायल के सुरक्षा मोर्चों और अमेरिका के साथ उसके संबंधों पर भी जोर रहा।