अमेरिका को युद्ध में घसीटने के आरोपों पर नेतन्याहू का जवाब: ‘क्या कोई ट्रंप को समझा सकता है’

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन आरोपों को सिरे से नकार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि इजरायल ने अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इन दावों को “फेक न्यूज” करार देते हुए कहा कि मौजूदा संघर्ष के 20 दिनों बाद ईरान की सैन्य क्षमताएं काफी हद तक कमजोर पड़ चुकी हैं। उनके अनुसार, ईरान अब न तो बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की स्थिति में है और न ही यूरेनियम संवर्धन करने में सक्षम है।

अमेरिका को युद्ध में खींचने के आरोपों पर जवाब

नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह धारणा गलत है कि इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस संघर्ष में उतरने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा, “क्या कोई वास्तव में यह सोच सकता है कि कोई ट्रंप को बता सकता है कि उन्हें क्या करना चाहिए?” उनके इस बयान को अमेरिका-इजरायल संबंधों में स्वतंत्र निर्णय लेने की नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रंप का अनुरोध और इजरायल का रुख

इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे ईरान के गैस फील्ड पर आगे के हमलों को कुछ समय के लिए रोकने का आग्रह किया था। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किया गया हमला पूरी तरह से इजरायल का अपना निर्णय था और इस अभियान में किसी अन्य देश की भागीदारी नहीं रही। नेतन्याहू ने यह भी भरोसा जताया कि मौजूदा हालात तेजी से बदल रहे हैं और यह युद्ध लोगों की उम्मीद से पहले समाप्त हो सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की चेतावनी पर प्रतिक्रिया

ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने इसे “ब्लैकमेल” बताया और कहा कि यह रणनीति सफल नहीं होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर निर्भरता कम की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि अरब प्रायद्वीप के जरिए नई पाइपलाइन परियोजनाएं विकसित की जाएं, जिनसे ऊर्जा सीधे इजरायल और भूमध्यसागर तक पहुंचाई जा सके।

ईरान की सैन्य स्थिति पर दावा

नेतन्याहू ने कहा कि पिछले 20 दिनों के संघर्ष में ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक, अब ईरान मिसाइल निर्माण या यूरेनियम संवर्धन जैसी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम नहीं है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने तालमेल की भी सराहना की और कहा कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत समन्वय है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रंप पहले से ही ईरान के परमाणु खतरे को लेकर पूरी तरह जागरूक हैं।

ईरान के भीतर उभरते संकेत

इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी दावा किया कि ईरान के अंदरूनी हालात में दरारें दिखाई देने लगी हैं। उनके अनुसार, वहां सत्ता के भीतर मतभेद उभर रहे हैं और नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अभी तक नया नेतृत्व स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और जटिल होती जा रही है।