धरती पर जीवन फिलहाल सुरक्षित जरूर है, लेकिन अंतरिक्ष में मंडरा रहे खतरों को लेकर वैज्ञानिक समुदाय सतर्क है। प्लैनेटरी डिफेंस से जुड़े विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि ऐसे हजारों एस्टेरॉयड अब भी हमारी निगरानी से बाहर हैं, जो भविष्य में पृथ्वी के लिए गंभीर संकट बन सकते हैं। ये विशाल अंतरिक्षीय पिंड किसी बड़े महानगर को भारी तबाही पहुंचाने की क्षमता रखते हैं, और यही चिंता वैज्ञानिकों की नींद उड़ा रही है।
अनजाने खतरों से ज्यादा डरएक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान NASA की प्लैनेटरी डिफेंस ऑफिसर केली फास्ट ने कहा कि उन्हें उन एस्टेरॉयड से कम और उन अनजान पिंडों से ज्यादा डर लगता है, जिनकी अभी तक पहचान ही नहीं हो पाई है। उनका कहना था कि बड़े एस्टेरॉयड पर लगातार नजर रखी जा रही है, जबकि बहुत छोटे पिंड अक्सर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जल जाते हैं।
असल चुनौती मध्यम आकार के उन एस्टेरॉयड से है, जिनका व्यास लगभग 500 फीट के आसपास होता है। ये इतने छोटे होते हैं कि सामान्य टेलीस्कोप से पकड़ में नहीं आते, लेकिन इतने बड़े जरूर होते हैं कि किसी शहर या पूरे क्षेत्र को व्यापक नुकसान पहुंचा सकें। इसी कारण इन्हें ‘सिटी किलर’ की श्रेणी में रखा जाता है।
हजारों पिंड अब भी निगरानी से बाहरविशेषज्ञों के अनुसार, पृथ्वी के आसपास लगभग 25,000 नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट्स (NEOs) मौजूद हैं, जिनमें से केवल करीब 40 प्रतिशत की ही सटीक पहचान हो पाई है। यानी लगभग 15,000 से ज्यादा एस्टेरॉयड ऐसे हैं, जिनकी लोकेशन और गति के बारे में ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इन पिंडों का आकार और संरचना इन्हें खोजने की प्रक्रिया को जटिल बना देती है। कई एस्टेरॉयड सूर्य की रोशनी को ठीक से परावर्तित नहीं करते, जिससे वे शक्तिशाली दूरबीनों की पकड़ से भी बच निकलते हैं। इसके अलावा, कुछ पिंड पृथ्वी की कक्षा के समानांतर सूर्य की परिक्रमा करते हैं, जिससे उनका पता लगाना और कठिन हो जाता है।
नई तकनीक से बढ़ेगी उम्मीदइस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक एक नई अंतरिक्ष दूरबीन लॉन्च करने की तैयारी में हैं— Near-Earth Object Surveyor। यह स्पेस टेलीस्कोप थर्मल सिग्नेचर के आधार पर काम करेगा और उन डार्क एस्टेरॉयड व धूमकेतुओं को खोजने में मदद करेगा, जो अब तक दृश्य प्रकाश आधारित टेलीस्कोप से छिपे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि हम संभावित खतरे को कितनी जल्दी पहचान पाते हैं। वैज्ञानिकों ने जोर देकर कहा है कि हमें एस्टेरॉयड के पृथ्वी के करीब आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि पहले से उन्हें ढूंढकर उनकी दिशा बदलने की तकनीक विकसित करनी होगी।
दिशा बदलना अब भी आसान नहींहालांकि 2022 में DART मिशन के जरिए यह साबित किया गया कि किसी एस्टेरॉयड की कक्षा को बदला जा सकता है, लेकिन यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने माना कि वास्तविक खतरे की स्थिति में तुरंत सक्रिय रूप से किसी बड़े पिंड को डिफ्लेक्ट करना अभी भी बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी से पर्याप्त संसाधन और अनुसंधान पर ध्यान दिया जाए तो मानवता इस संभावित खतरे के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकती है।
YR4 बना नई चिंता का कारणवैज्ञानिकों की निगरानी में एक एस्टेरॉयड YR4 भी है, जिसे ‘सिटी किलर’ श्रेणी में रखा गया है। 2024 से यह रडार पर है और 2032 में इसके चंद्रमा से टकराने की लगभग 4 प्रतिशत संभावना जताई गई है। हालांकि यह प्रतिशत कम प्रतीत होता है, लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान में इसे नजरअंदाज नहीं किया जाता।
कुछ विशेषज्ञों ने आपात स्थिति में परमाणु विकल्प जैसे उपायों पर भी चर्चा की है— ठीक वैसे ही जैसे हॉलीवुड फिल्म Armageddon में दिखाया गया था। हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि वास्तविक दुनिया में ऐसे कदम बेहद जटिल और जोखिम भरे होंगे।