ईरान संकट के बीच अमेरिका को इटली का झटका, सिगोनेला बेस इस्तेमाल करने से रोक दिया

रोम: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच, इटली ने अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाया है। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने अमेरिका को देश के सिगोनेला नेवल एयर बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति देने से मना कर दिया। इटली के प्रमुख अखबार ला रिपब्लिका की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के कुछ हवाई जहाज पश्चिम एशिया के लिए उड़ान भरने से पहले सिगोनेला में उतरने की योजना बना रहे थे। लेकिन इस योजना के लिए इटली से कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और न ही सैन्य नेताओं से सलाह ली गई।

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी का रुख

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये उड़ानें सामान्य या लॉजिस्टिकल नहीं थीं, और इसलिए यह इटली के साथ हुए द्विपक्षीय समझौतों के दायरे में नहीं आती। मार्च की शुरुआत में प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने RTL रेडियो को दिए इंटरव्यू में कहा था, “हम युद्ध में नहीं हैं और न ही युद्ध में जाना चाहते हैं।”
अमेरिकी सहयोगियों की स्थिति

इटली के रक्षा मंत्री क्रोसेटो ने एक संसदीय बहस में अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों की निष्क्रियता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि ईरान पर अमेरिकी हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर हैं, लेकिन किसी भी सरकार, चाहे वह यूरोपीय हो या अन्य, इस हमले को रोकने में सक्षम नहीं थी।

इटली की धरती का इस्तेमाल केवल अनुमति पर

प्रधानमंत्री मेलोनी ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी हमलों में इटली की भूमि का उपयोग केवल सरकारी अनुमति से ही संभव है। इस मामले में कोई अनुमति नहीं मांगी गई। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद ही क्यों न रहे।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

इटली में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के संभावित इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल का खतरा है। देश की जनता ऐतिहासिक रूप से अमेरिका की नेतृत्व वाली सैन्य कार्रवाइयों में शामिल होने के प्रति सतर्क रही है। इटली की सरकार ने जोर दिया है कि सिसिली के नेवल एयर स्टेशन सिगोनेला का इस्तेमाल केवल लॉजिस्टिकल और तकनीकी सहायता के लिए सीमित रहेगा, जैसा कि लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय समझौतों में तय है।