ईरान की सर्वोच्च धार्मिक-राजनीतिक संस्था Assembly of Experts ने बुधवार को एक अहम और बहुचर्चित निर्णय लेते हुए मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब पूर्व सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की हालिया हवाई हमलों में मौत के बाद सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर गहरा असमंजस बना हुआ था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट Iran International की रिपोर्ट के मुताबिक, इस चयन प्रक्रिया पर देश की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का निर्णायक प्रभाव रहा।
उत्तराधिकार संकट के बीच तेज हुई प्रक्रियाबताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान की सत्ता संरचना में अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई थी। ऐसे संवेदनशील दौर में विशेषज्ञ सभा की पूर्ण बैठक आयोजित करना संभव नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा युद्ध जैसे हालात को देखते हुए निर्णय आभासी बैठकों, सीमित परामर्श और आंतरिक सहमति के आधार पर लिया गया।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि IRGC ने इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। संगठन ने कथित तौर पर कट्टरपंथी धड़ों को एक मंच पर लाकर मोजतबा खामेनेई के समर्थन में माहौल तैयार किया। माना जाता है कि सुरक्षा तंत्र और सैन्य प्रतिष्ठान में उनकी पकड़ तथा पिता के करीबी सहयोगी के रूप में उनकी छवि ने इस निर्णय को आसान बनाया।
पर्दे के पीछे प्रभावशाली चेहरा56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरानी सत्ता के गलियारों में एक प्रभावशाली, किंतु अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक प्रोफाइल वाले नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। वे मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं और उन्हें ‘हुज्जतुल इस्लाम’ की उपाधि प्राप्त है। वर्षों से वे सुरक्षा संस्थानों और अर्धसैनिक बलों, विशेषकर IRGC और बसिज मिलिशिया के साथ निकट संबंधों के लिए पहचाने जाते रहे हैं।
हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर देश के भीतर बहस छिड़ गई है। ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति की मूल विचारधारा वंशानुगत सत्ता हस्तांतरण के खिलाफ रही है। ऐसे में आलोचकों का तर्क है कि पिता के बाद पुत्र का सर्वोच्च पद पर पहुंचना क्रांति की भावना के विपरीत है और यह व्यवस्था को ‘राजशाही’ की दिशा में ले जाने जैसा कदम माना जा सकता है। कुछ कट्टरपंथी धड़े भी निजी तौर पर इस पर असहजता जता रहे हैं।
धार्मिक योग्यता पर उठे सवालविश्लेषकों का मानना है कि सर्वोच्च नेता के पद के लिए आवश्यक उच्च धार्मिक रैंक की तुलना में मोजतबा की मौजूदा स्थिति अपेक्षाकृत निम्न मानी जाती है। परंपरागत रूप से यह पद उच्च कोटि के मरजा या आयतुल्ला स्तर के धर्मगुरु को सौंपा जाता रहा है। इसके बावजूद, IRGC के मजबूत समर्थन और राजनीतिक समीकरणों ने उनके चयन का मार्ग प्रशस्त किया।
28 फरवरी के हमले के बाद बना अंतरिम प्रबंधअली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी 2026 को हुए अमेरिका-इजरायल हवाई हमलों में हुई थी। उनके निधन के तुरंत बाद सत्ता का अस्थायी दायित्व तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद को सौंपा गया था, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक वरिष्ठ धर्मविद शामिल थे। इस दौरान विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने संकेत दिया था कि नया सर्वोच्च नेता जल्द घोषित किया जाएगा।
अब मोजतबा खामेनेई के औपचारिक चयन के साथ ही ईरान की सत्ता संरचना में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस नियुक्ति से देश में कट्टरपंथी और सुरक्षा-प्रधान नीतियों को और बल मिल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब ईरान बाहरी दबाव और सैन्य तनाव का सामना कर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नया नेतृत्व आंतरिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।