राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन इसके बावजूद कई सरकारी कर्मचारी रिश्वतखोरी से बाज नहीं आ रहे हैं। जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में घूस मांगने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में एसीबी ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नीमराणा क्षेत्र में अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान धर्म सिंह के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर भूमि संबंधी कार्यों के बदले शिकायतकर्ता से पैसे मांग रहा था। एसीबी की टीम ने उसे 4500 रुपये की रिश्वत लेते समय दबोच लिया।
जमीन से जुड़े काम के बदले मांगे थे रुपयेएसीबी अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने ब्यूरो को जानकारी दी थी कि उसकी भूमि से जुड़े कुछ राजस्व कार्य लंबित थे और उन्हें पूरा करने के बदले पटवारी लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। शिकायत में बताया गया कि अक्टूबर 2025 में परिवार की महिलाओं के हक त्याग (रिलिंक्विशमेंट) की प्रक्रिया दर्ज कराने के लिए आरोपी ने 10 हजार रुपये की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि आर्थिक कारणों से वह उस समय इतनी बड़ी राशि देने में सक्षम नहीं था, जिसके कारण कार्य भी प्रभावित हुआ। बाद में उसने कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने भूमि संबंधी अन्य कार्य पूरे कराने की कोशिश की।
सीमांकन आवेदन के बाद फिर शुरू हुई पैसों की मांगमामला यहीं नहीं रुका। शिकायतकर्ता ने 22 मई 2026 को जमीन के सीमांकन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आरोप है कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के बदले पटवारी ने फिर से रिश्वत की मांग शुरू कर दी।
शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने सीमांकन कार्य के लिए 10 हजार रुपये और पहले किए गए नामांतरण से जुड़े कार्य के लिए अतिरिक्त 5 हजार रुपये की मांग रखी। लगातार हो रही मांगों से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने आखिरकार एसीबी से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
सत्यापन में सामने आई रिश्वत की डीलशिकायत मिलने के बाद एसीबी ने नियमानुसार मामले का सत्यापन कराया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी पटवारी सीमांकन कार्य के एवज में 5 हजार रुपये रिश्वत लेने पर अड़ा हुआ था।
बाद में बातचीत के दौरान उसने राशि में 500 रुपये की कमी कर दी और 4500 रुपये लेने पर सहमति जता दी। एसीबी ने इस पूरी प्रक्रिया की पुष्टि होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।
योजना के तहत बिछाया गया जालसत्यापन पूरा होने के बाद एसीबी के उप महानिरीक्षक द्वितीय ओमप्रकाश मीणा की निगरानी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञान प्रकाश नवल के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने तय योजना के अनुसार कार्रवाई को अंजाम दिया।
जैसे ही आरोपी ने शिकायतकर्ता से 4500 रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार की, एसीबी की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। कार्रवाई इतनी सटीक थी कि आरोपी को संभलने तक का मौका नहीं मिल पाया और वह रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामलाएसीबी अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या वह पहले भी इसी तरह के मामलों में शामिल रहा है या नहीं।
ब्यूरो का कहना है कि रिश्वतखोरी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और आम लोगों से अपील की गई है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी कार्य के बदले अवैध रूप से धन की मांग करता है, तो उसकी सूचना तुरंत एसीबी को दें। मामले में आगे की जांच जारी है और जांच के आधार पर अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।