ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार, 26 मार्च को घोषणा की कि भारत उन पाँच मित्र देशों में शामिल है जिनके जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिल गई है। मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास ने अपने आधिकारिक पोस्ट में बताया कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाज अब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से बिना रोक-टोक गुजर सकते हैं। यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अपील के तुरंत बाद आई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्वहोर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल मार्गों में गिना जाता है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। यह 33-39 किमी चौड़ा मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और प्रमुख खाड़ी देशों से तेल निर्यात करने का मुख्य रास्ता है। जंग की स्थिति के चलते ईरान ने इस जलमार्ग को आंशिक रूप से बंद कर दिया था और केवल कुछ चुनिंदा जहाजों को गुजरने की अनुमति दी थी।
गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों को मिली हरी झंडी25 मार्च को न्यूयॉर्क में ईरान के मिशन ने स्पष्ट किया था कि केवल “गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों” को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसका मतलब है कि दुश्मन देशों के जहाज इस छूट के दायरे में नहीं आते।
मिशन ने अपने X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में कहा, “गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज, चाहे वे अन्य देशों के हों या उनसे जुड़े हों, होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजर सकते हैं। शर्त यह है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई में भाग न लें या उसका समर्थन न करें और घोषित सुरक्षा नियमों का पालन करें। यह सब सक्षम ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय में किया जाएगा।”
भारत सरकार की प्रतिक्रियाभारत सरकार ने बुधवार को मिडिल ईस्ट संकट पर सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि यह एक कूटनीतिक सफलता है कि पेट्रोलियम उत्पाद लेकर भारत आने वाले चार जहाज पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। वहीं, पांच और जहाज जल्द ही पार करने की उम्मीद है।
हालांकि, भारत आने वाले कुल 18 जहाज अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास फंसे हुए हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष में कथित मध्यस्थता के संदर्भ में पाकिस्तान को “दलाल राष्ट्र” करार दिया है।