ईरान में तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए गंभीर ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान में मौजूद उसके नागरिक बिना किसी देरी के देश छोड़ दें। यह चेतावनी दिसंबर 2025 के आख़िरी दिनों से शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आई है, जो जनवरी में बढ़ते-बढ़ते देश के लगभग हर हिस्से में फैल चुके हैं। इन प्रदर्शनों की जड़ में गहराता आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोज़गारी और राजनीतिक असंतोष बताया जा रहा है।
अमेरिकी वर्चुअल एंबेसी ने अपने आधिकारिक बयान में आशंका जताई है कि हालात किसी भी समय और अधिक हिंसक हो सकते हैं। चेतावनी में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां, गंभीर चोटें और जानमाल के नुकसान की घटनाएं हो सकती हैं। ऐसे हालात में विदेशी नागरिकों के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
संचार ठप, सड़कें बंद और उड़ानों पर असरईरान सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए देशभर में मोबाइल सेवाओं, लैंडलाइन और इंटरनेट नेटवर्क पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। संचार व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है, जिससे लोगों के लिए एक-दूसरे से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है। कई प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया गया है, सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बाधित हैं और शहरों के बीच आवाजाही पर रोक लगाई गई है।
इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए कई विदेशी एयरलाइंस ने ईरान के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं या उन्हें सीमित कर दिया है। अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि यदि संभव हो तो सुरक्षित ज़मीनी मार्गों का इस्तेमाल करते हुए आर्मेनिया या तुर्की की सीमा की ओर निकल जाएं। एडवाइजरी में यह भी साफ किया गया है कि वे अमेरिकी सरकार की तात्कालिक मदद पर निर्भर न रहें, क्योंकि ईरान में अमेरिका का कोई दूतावास मौजूद नहीं है, जिससे कांसुलर सहायता बेहद सीमित हो जाती है।
पूरे देश में फैला विरोध, हिंसा की कई रिपोर्टेंईरान में चल रहे मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को हाल के वर्षों के सबसे व्यापक आंदोलनों में से एक माना जा रहा है। ये प्रदर्शन देश के 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। सड़कों पर उतरे लोग खुले तौर पर सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और इस्लामी शासन के खिलाफ नारेबाज़ी कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है।
हालांकि, देशभर में इंटरनेट बंद होने के कारण वास्तविक आंकड़ों की पुष्टि करना कठिन हो रहा है। फिर भी कई स्वतंत्र रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाई गई हैं, जिससे स्थिति और अधिक भयावह हो गई है।
अमेरिका की रणनीति और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंताईरान सरकार ने इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार देते हुए आरोप लगाया है कि इसके पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे आर्थिक बदहाली, सामाजिक असमानता और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इस बीच यह आशंका भी गहराती जा रही है कि कहीं हालात सैन्य टकराव की ओर न बढ़ जाएं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के संकेत देते हुए 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है और यह भी इशारा दिया है कि अमेरिका सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। इन बयानों से ईरान में पहले से मौजूद अस्थिरता और बढ़ गई है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता का माहौल बन गया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने विशेष रूप से दोहरी नागरिकता रखने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि ऐसे नागरिकों के लिए गिरफ्तारी और पूछताछ का खतरा अधिक बताया जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में ईरान में रहना विदेशी नागरिकों के लिए बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है।