आखिर क्यों समतल पैर वालों को भारतीय सेना में नहीं किया जाता हैं भर्ती? यहां जानें इसके पीछे की सच्चाई

अपनी नौकरी को लेकर हर किसी का एक सपना होता हैं और चाहत होती हैं कि वह कौनसी नौकरी करें। ऐसे में कई लोग सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने की ख्वाहिश रखते हैं। इसमें भर्ती होने के लिए कई बार युवकों के पास सभी योग्यता होती हैं लेकिन उन्हें अपने समतल पैर की वजह से नहीं लिया जाता हैं। जी हां, सेना ऐसे लोगों की भर्ती नहीं करती हैं जिनके पैर फ्लैट हो अर्थात पैरों के तलुओं में घुमाव होने के बजाए पूरी तरह समतल हो। अब ऐसा किस लिए किया जाता हैं, आइये जानते हैं इसके बारे में।

फ्लैट पैर या समतल होने से पैरों में भार वहन करने की क्षमता कम हो जाती है। फ्लैट फुट वाला इंसान ज्यादा तेज भाग नहीं सकता है। दौड़ते समय उनके पैर आपस में लड़ते हैं। तलुओं के बीच में पाया जाने वाला घुमाव स्प्रिंग की तरह काम करता है, इसके न होने पर कमर दर्द की शिकायत भी होती है। इसमें पैरों में थकान महसूस होती है। इनके लिए दौड़ने, कूदने जैसी गतिविधियों में समस्या आती है। इसके अलावा पैर में दर्द भी होता है।

शुरुआत में पैर से दर्द शुरू होता है और फिर घुटनों, पीठ के निचले हिस्से और कूल्हे तक दर्द पहुंच सकता है। इस कारण शरीर के वजन का वितरण असमान हो जाता है, जो बड़ी समस्या का कारण बन सकता है। अतः दुनिया की कोई भी सेना अपने किसी ऐसे सैनिक की भर्ती नहीं करती जिसे सैन्य सेवा देने में कोई भी शारीरिक या मानसिक समस्या का सामना करना पड़े इसलिए उनको मेडिकल अनफिट कर दिया जाता है।