आज के दौर में हवाई जहाज से सफर करना सामान्य बात है, लेकिन करीब एक सदी पहले उड़ान भरना किसी जादू से कम नहीं माना जाता था। उस समय दुनिया की बड़ी आबादी ने न तो विमान को करीब से देखा था और न ही उसमें बैठने की कल्पना की थी। ऐसे दौर में 18 फरवरी 1930 का दिन इतिहास के पन्नों में इसलिए दर्ज हो गया, क्योंकि इसी दिन एक गाय ने पहली बार हवाई जहाज से उड़ान भरी।
इस गाय का नाम था Elm Farm Ollie। जब वह सैकड़ों फीट की ऊंचाई पर आसमान में उड़ी, तो यह घटना लोगों के लिए आश्चर्य और कौतूहल का विषय बन गई। वह विमान से उड़ान भरने वाली दुनिया की पहली गाय बनी और देखते ही देखते चर्चा का केंद्र बन गई।
आखिर क्यों करवाई गई थी गाय की हवाई यात्रा?
यह अनोखा प्रयोग किसी सनक का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक स्पष्ट व्यावसायिक रणनीति थी। यह घटना अमेरिका के न्यू जर्सी में आयोजित की गई थी। उस समय डेयरी उद्योग अपने उत्पादों को लेकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहा था। पैकेज्ड और ब्रांडेड दूध बाजार में नया-नया आया था, और कंपनियां यह संदेश देना चाहती थीं कि उनका दूध स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक तकनीक से जुड़ा है।
इसी सोच के तहत एक अनूठी योजना बनाई गई—क्यों न दूध को आसमान से लोगों तक पहुंचाया जाए? इसके लिए एक स्वस्थ, शांत और अच्छी नस्ल की गाय का चयन किया गया, जो इस प्रयोग के लिए उपयुक्त मानी गई। Elm Farm Ollie को खासतौर पर तैयार किया गया ताकि वह उड़ान के दौरान सुरक्षित रह सके।
विमान में खास इंतजाम, हवा में निकाला गया दूधसाल 1930 में किसी पशु को हवाई जहाज में बैठाकर उड़ाना आसान काम नहीं था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाय को एक विशेष हार्नेस से बांधा गया, ताकि उड़ान के दौरान उसे कोई चोट न पहुंचे। जिस विमान में उसे ले जाया गया, वह था Ford Trimotor — उस समय का लोकप्रिय और भरोसेमंद विमान मॉडल।
विमान के भीतर उसके लिए पर्याप्त जगह और देखभाल की व्यवस्था की गई थी। उड़ान के दौरान ही उसका दूध निकाला गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण था। उस दूध को धातु के डिब्बों में भरकर पैराशूट की मदद से नीचे जमीन पर उतारा गया। जब आसमान से दूध के कंटेनर सुरक्षित तरीके से नीचे पहुंचे, तो वहां मौजूद लोग दंग रह गए। यह नजारा उस दौर के लिए किसी तमाशे से कम नहीं था।
‘उड़ने वाली गाय’ की कहानी बनी सुर्खियांइस अनोखी घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे। अगले ही दिन अखबारों में इसकी तस्वीरें और खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुईं। “फ्लाइंग काउ” की चर्चा पूरे अमेरिका में फैल गई और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान इस ओर गया।
डेयरी कंपनियों को जितना प्रचार चाहिए था, उससे कहीं ज्यादा उन्हें इस एक प्रयोग से मिल गया। Elm Farm Ollie सिर्फ एक गाय नहीं रही, बल्कि वह एक प्रतीक बन गई—आधुनिकता, नवाचार और विज्ञापन की नई सोच का प्रतीक।
आने वाले वर्षों में उसके बारे में कई लेख लिखे गए, और वह इतिहास में दर्ज एक अनोखी घटना के रूप में याद की जाने लगी। आज भी जब विमानन और विज्ञापन के इतिहास की चर्चा होती है, तो सैकड़ों फीट ऊपर उड़ान भरने वाली उस गाय का जिक्र जरूर होता है, जिसने दुनिया को चौंका दिया था।