Smartphone Sleep Tracking: Accelerometer और Gyroscope से कैसे पता चलता है कि आप सो रहे हैं?

क्या आपने कभी सोचा है कि आपका स्मार्टफोन रात में आपकी नींद का हिसाब कैसे रख लेता है? कई फोन और उनसे जुड़े ऐप यह जानकारी दे सकते हैं कि आप कब सोए, कितनी देर तक सोए और कब जागे। इसके पीछे कोई ऐसी तकनीक नहीं होती जो सीधे यह देखती हो कि आपकी आंखें बंद हैं या आप वास्तव में सो रहे हैं। इसके बजाय फोन के सेंसर से मिलने वाले डेटा और सॉफ्टवेयर विश्लेषण के आधार पर नींद का अनुमान लगाया जाता है।

फोन किन संकेतों से लगाता है नींद का अंदाजा?

स्मार्टफोन आपके शरीर की स्थिति को सीधे मापकर नींद की पुष्टि नहीं करता। फोन के इस्तेमाल, उसकी गतिविधि और सेंसर से मिलने वाले संकेतों को सॉफ्टवेयर एक साथ देखता है। लंबे समय तक फोन का इस्तेमाल न होना और सेंसर द्वारा बहुत कम हलचल दर्ज करना सिस्टम के लिए सोने की अवधि का संकेत हो सकता है।

इस प्रक्रिया में मशीन लर्निंग और दूसरे सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम उपलब्ध डेटा का विश्लेषण करते हैं। इसी आधार पर फोन या स्लीप-ट्रैकिंग ऐप नींद का अनुमान तैयार करते हैं।

Accelerometer की क्या भूमिका है?


स्मार्टफोन में लगा Accelerometer डिवाइस की गति और हलचल में होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड करता है। जब फोन बेड पर रखा हो और उसमें ज्यादा गतिविधि न हो, तो सेंसर कम मूवमेंट दर्ज कर सकता है।

इसके उलट फोन चलाते समय हाथ की गतिविधि, डिवाइस की स्थिति में बदलाव और स्क्रीन पर किए गए टच से सेंसर को लगातार अलग-अलग संकेत मिलते हैं। स्लीप-ट्रैकिंग ऐप इन गतिविधियों को नींद का अनुमान लगाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

Gyroscope भी करता है मदद


फोन का Gyroscope डिवाइस की दिशा और उसके घूमने से जुड़े बदलावों का पता लगाने में मदद करता है। इससे सिस्टम को यह समझने में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है कि फोन स्थिर है या उसकी स्थिति में लगातार परिवर्तन हो रहा है।

हालांकि, केवल Gyroscope के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई व्यक्ति सो रहा है। इसलिए नींद का अनुमान लगाने वाले सिस्टम आमतौर पर इसे अन्य उपलब्ध संकेतों के साथ मिलाकर देखते हैं।
Smartwatch से मिल सकता है ज्यादा डेटा

जब फोन के साथ Smartwatch या fitness band भी इस्तेमाल किया जाता है, तो स्लीप ट्रैकिंग के लिए ज्यादा तरह की जानकारी उपलब्ध हो सकती है। ऐसी डिवाइस में Accelerometer के अलावा Heart Rate Sensor और कुछ मॉडलों में SpO2 सेंसर भी मौजूद होते हैं।

कलाई की गतिविधि और हृदय गति में होने वाले बदलावों का विश्लेषण करके ये डिवाइस नींद के अलग-अलग स्तरों का अनुमान लगाने की कोशिश करती हैं। इसी वजह से केवल स्मार्टफोन की तुलना में smartwatch से मिलने वाला sleep-tracking डेटा अधिक विस्तृत हो सकता है।

क्या स्मार्टफोन हमेशा सही बताता है?

नहीं। स्मार्टफोन से मिलने वाला sleep-tracking डेटा पूरी तरह सटीक होने की गारंटी नहीं देता। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति बिस्तर पर फोन से दूर रहकर लंबे समय तक फिल्म देख रहा है, तो कम फोन गतिविधि के कारण सिस्टम इसे सोने की अवधि मान सकता है।

इसी तरह रात में बार-बार जागने की स्थिति में भी रिकॉर्ड किया गया डेटा वास्तविक नींद के पैटर्न से अलग हो सकता है। इसलिए फोन या दूसरी डिवाइस से मिलने वाली sleep tracking को सामान्य रिकॉर्ड या अनुमान के तौर पर देखना चाहिए। इसे मेडिकल जांच का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।