पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में राजनीतिक माहौल उस वक्त गरमा गया जब जगदल इलाके में बीजेपी और टीएमसी समर्थकों के बीच देर रात तीखी झड़प हो गई। यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगदल स्थित जलेबी माठ मैदान में बड़ी जनसभा प्रस्तावित है। रैली से ठीक पहले हुई इस हिंसा ने इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
थाने के सामने बढ़ा विवाद, हाथापाई तक पहुंची बातजानकारी के मुताबिक, यह टकराव बैरकपुर के जगदल थाना परिसर के बाहर शुरू हुआ और देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए और विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट शुरू हो गई। हालात इस कदर बिगड़ गए कि दोनों ओर से एक-दूसरे पर ईंट-पत्थर फेंके गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
पूर्व सांसद अर्जुन सिंह भी बने निशानाइस झड़प के दौरान बैरकपुर से पूर्व सांसद अर्जुन सिंह भी विवाद के बीच आ गए। आरोप है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेरने और खींचने की कोशिश की। मारपीट के दौरान उन्हें निशाना बनाया गया, हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप से स्थिति और बिगड़ने से बचा लिया गया।
विवाद की वजह क्या रही?सूत्रों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब बीजेपी के जगदल विधानसभा प्रत्याशी राजेश कुमार रविवार रात करीब 10:30 बजे पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज किए जाने वाले एक मामले से संबंधित दस्तावेज की प्रति प्राप्त करना था। इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस के पार्षद मनोज पांडे, सौरभ सिंह और अन्य कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए।
जैसे ही यह सूचना फैली, नोआपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार अर्जुन सिंह भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। बताया जाता है कि कार से उतरते ही उनकी टीएमसी समर्थकों से कहासुनी हो गई, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई। स्थिति इतनी बिगड़ी कि कथित तौर पर पुलिस स्टेशन के भीतर भी धक्का-मुक्की और हाथापाई की नौबत आ गई।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, इलाके में भारी बल तैनातघटना की गंभीरता को देखते हुए जगदल थाना पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को अलग कराया। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। पुलिस ने सभी पक्षों को थाना परिसर से हटाकर शांति व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की है।
रैली से पहले हुई इस घटना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियां अब प्रधानमंत्री की सभा को लेकर और अधिक सतर्क हो गई हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।