ममता सरकार के पूर्व मंत्री उदयन गुहा गिरफ्तार, जबरन वसूली और CM शुभेंदु अधिकारी पर हमले का आरोप

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई नेताओं के खिलाफ पुराने मामलों में कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में बुधवार को राज्य पुलिस ने टीएमसी के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रह चुके उदयन गुहा को कोलकाता के फूलबागान इलाके से हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि कूचबिहार पुलिस ने उन्हें कथित तोलाबाजी यानी जबरन वसूली से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया है। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि गिरफ्तारी किस विशेष मामले के तहत की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उदयन गुहा पर आरोप है कि उन्होंने एक सरकारी अस्पताल में बच्चों के लिए विशेष चिकित्सा इकाई स्थापित कराने के नाम पर स्थानीय व्यापारियों और अन्य लोगों से बड़ी रकम जुटाई थी। आरोप यह भी है कि परियोजना के लिए करोड़ों रुपये एकत्र किए गए, लेकिन उस धनराशि का पूरा उपयोग निर्धारित कार्यों में नहीं किया गया। इसी मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराने वाले रूपम साहा ने कहा कि लंबे समय से इस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा था और अब जाकर मामले में ठोस कदम उठाया गया है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद अस्पताल परियोजना के नाम पर लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। लेकिन इसके मुकाबले केवल 40 से 50 लाख रुपये के आसपास का ही विकास कार्य कराया गया। आरोप है कि शेष राशि के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े हुए, जिनका संतोषजनक जवाब कभी नहीं दिया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।

उदयन गुहा का नाम इससे पहले भी राजनीतिक विवादों में सामने आ चुका है। वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछले वर्ष सितंबर में उन पर अपने काफिले पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया था। उस समय शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनके वाहन पर हमला किसी सामान्य घटना का हिस्सा नहीं बल्कि सुनियोजित कार्रवाई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि तत्कालीन राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन मामले की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
उस वक्त नेता प्रतिपक्ष रहे शुभेंदु अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि 5 अगस्त को कूचबिहार के खागड़ाबाड़ी क्षेत्र में उनकी गाड़ी पर हमला उदयन गुहा के निर्देश पर किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि हमले में शामिल लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और इसी वजह से पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई। अधिकारी का कहना था कि पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी तो दर्ज की, लेकिन उसमें जानबूझकर उदयन गुहा का नाम शामिल नहीं किया गया।

शुभेंदु अधिकारी ने उस समय यह भी कहा था कि वह इस मामले को किसी भी कीमत पर दबने नहीं देंगे और सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने पुलिस पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जांच की दिशा को प्रभावित करने की कोशिश की गई ताकि मुख्य आरोपियों को राहत मिल सके।

इस पूरे विवाद को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख भी किया था। उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया था कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है और उदयन गुहा को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनकी ओर से यह भी कहा गया था कि घटना से संबंधित विभिन्न शिकायतों और एफआईआर में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं, जिनकी जांच जरूरी है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा था कि दर्ज की गई दोनों एफआईआर में क्या अंतर है और शिकायतों में किन तथ्यों को शामिल किया गया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा था कि क्या शुभेंदु अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में किसी बड़ी साजिश या संगठित हमले की आशंका जताई गई थी। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित आईजीपी को निर्धारित समय सीमा के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।

फिलहाल उदयन गुहा की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे कानून के तहत कार्रवाई बता रहा है, जबकि टीएमसी समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध के तौर पर देख रहे हैं। पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि पूर्व मंत्री के खिलाफ किन धाराओं और किन मामलों में कार्रवाई की गई है।