₹8765715586: जानिए ममता बनर्जी की TMC के पास कितना विशाल फंड, ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक सत्ता में रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह राजनीतिक नहीं बल्कि पार्टी के वित्तीय आंकड़े हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 की हालिया ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद पार्टी की संपत्ति और फंडिंग को लेकर बड़े खुलासे हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक के आंकड़ों में पार्टी के बैंक खातों और निवेश से जुड़ी भारी-भरकम राशि दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसमें आगे के महीनों यानी मार्च 2026 के बाद के वित्तीय आंकड़े शामिल नहीं हैं। इसी अवधि के आसपास राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव और चुनावी परिणामों को लेकर भी चर्चा तेज रही, जहां ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा।

बैंक खातों में करोड़ों की रकम का खुलासा

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों में कुल 6,25,79,87,264 रुपये (लगभग 625 करोड़ 79 लाख 87 हजार 264 रुपये) जमा हैं। यह राशि विभिन्न बैंक खातों में पार्टी के ऑपरेशनल और राजनीतिक फंड के रूप में दर्ज है।

फिक्स्ड डिपॉजिट में भी भारी निवेश

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पार्टी ने फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में 2,50,77,28,322 रुपये (करीब 250 करोड़ 77 लाख 28 हजार 322 रुपये) का निवेश किया हुआ है।

जब बैंक बैलेंस और एफडी को मिलाकर कुल संपत्ति जोड़ी जाती है, तो यह आंकड़ा बढ़कर 8,76,57,15,586 रुपये (लगभग 876 करोड़ 57 लाख 15 हजार 586 रुपये) तक पहुंच जाता है।
नकद लेनदेन का भी उल्लेख

ऑडिट दस्तावेजों के अनुसार पार्टी के पास बड़ी मात्रा में नकदी भी मौजूद है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लगभग 50,00,00,000 रुपये (50 करोड़ रुपये) का कैश उपलब्ध है। इसके अलावा केंद्रीय और क्षेत्रीय कार्यालयों में मिलाकर करीब 31,28,028 रुपये (31 लाख 28 हजार 28 रुपये) नकद भी दर्ज किया गया है।

1998 में हुई थी TMC की स्थापना

तृणमूल कांग्रेस यानी All India Trinamool Congress की स्थापना 1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी ने की थी। कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का गठन किया था, जिसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई दिशा देना था। ममता बनर्जी तीन बार राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और उन्होंने समय के साथ पार्टी को मजबूत संगठन में बदला।

2011 में सत्ता में आई पार्टी


TMC ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेजी से अपनी पकड़ बनाई और 2011 के विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसी साल ममता बनर्जी पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया।

मौजूदा राजनीतिक स्थिति और चुनौतियां


हालांकि हाल के वर्षों में पार्टी को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर बताई जा रही है और अब वह विपक्ष की भूमिका में है।

इसके साथ ही संगठनात्मक स्तर पर भी अस्थिरता की खबरें सामने आ रही हैं। पार्टी के कुछ सांसद और विधायक असंतोष जताते हुए अलग रुख अपना रहे हैं, जिससे टीएमसी के भीतर अंदरूनी संकट और संभावित टूट की अटकलें तेज हो गई हैं।