'मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई रोकी जाए', युसूफ पठान समेत तीन सांसदों ने अमित शाह से की हस्तक्षेप की मांग

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में मस्जिदों से अजान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर हटाए जाने का मामला अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए तीन सांसदों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। बहरामपुर से सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर युसूफ पठान, मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान और जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने गृह मंत्रालय को संयुक्त ज्ञापन सौंपते हुए पुलिस की कथित कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

गृह मंत्री को सौंपा संयुक्त ज्ञापन

गुरुवार को तीनों सांसदों ने गृह मंत्री कार्यालय को भेजे गए ज्ञापन में कहा कि वे ध्वनि प्रदूषण से जुड़े कानूनों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरा सम्मान करते हैं। उनका कहना है कि कानून का पालन आवश्यक है, लेकिन उसका क्रियान्वयन सभी समुदायों के साथ समान, निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से होना चाहिए। सांसदों ने आग्रह किया कि किसी भी कार्रवाई से लोगों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित न हों और प्रशासन इस पहलू का विशेष ध्यान रखे।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में ये तीनों नेता तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर एनसीपीआई का दामन थाम लिया।

क्या है पूरा मामला?

पिछले कुछ दिनों से मुर्शिदाबाद के विभिन्न इलाकों से ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि पुलिस मस्जिदों में लगे अजान के लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई कर रही है। इसी को लेकर सांसदों ने केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है और इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

हालांकि, पश्चिम बंगाल पुलिस ने इन आरोपों को किसी एक समुदाय से जोड़ने से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, नियम सभी धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू किए जा रहे हैं और किसी विशेष धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
एनडीए की बैठकों से बनाई दूरी

युसूफ पठान, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई का साथ दिया है। यह पार्टी अभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नहीं है और पहले त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में सीमित सीटों पर चुनाव लड़ चुकी है। पार्टी को बीजेपी समर्थक माना जाता है।

इसके बावजूद मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले इन तीनों सांसदों ने हाल के दिनों में एनडीए की बैठकों से दूरी बनाए रखी। उनका कहना था कि वे ऐसे किसी भी प्रस्ताव या कानून का समर्थन नहीं करेंगे, जिसे मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ माना जाए।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मुद्दा भी उठाया

लाउडस्पीकर विवाद के साथ-साथ सांसदों ने मतदाता पहचान पत्र (EPIC) से जुड़े ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों का मुद्दा भी गृह मंत्रालय के सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं और उनके मामलों का निपटारा लंबे समय से लंबित है।

सांसदों का कहना है कि इस देरी के कारण प्रभावित लोगों को पासपोर्ट सत्यापन, संपत्ति की रजिस्ट्री और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि वर्ष के अंत तक सभी वास्तविक और लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए।

चुनाव आयोग के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के आंकड़ों का हवाला देते हुए सांसदों ने बताया कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अकेले मुर्शिदाबाद जिले में करीब 4.55 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह संख्या राज्य के सभी जिलों में सबसे अधिक बताई जा रही है, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।