पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग के फैसले पर ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है।
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद ममता बनर्जी ने प्रेस ब्रीफिंग में बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बनाई गई उनकी पार्टी को बीजेपी ने ‘हाईजैक’ कर लिया है। ममता ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक पक्षपात और बदले की कार्रवाई बताया।
ममता बोलीं- लोकतांत्रिक इतिहास में काला दिनममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी संवैधानिक पद का अपमान नहीं करती, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम देश के लोकतांत्रिक इतिहास में काला दिन है। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले को लेकर कहा कि देश में जो कुछ हो रहा है, वह उनके अनुसार दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब एक राजनीतिक दल के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए की जा रही पक्षपातपूर्ण बदले की कार्रवाई है। ममता ने कहा कि पहले ही इस तरह की आशंका जताई जा रही थी कि उनकी पार्टी को न अपना नाम रखने दिया जाएगा और न ही पुराना चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने दिया जाएगा।
ममता ने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को अपनी सीमाएं समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सत्ता में हैं, जरूरी नहीं कि वे हमेशा सत्ता में रहें।
‘बीजेपी मेरी पार्टी को खत्म नहीं कर सकती’ममता बनर्जी ने दावा किया कि 1998 में कांग्रेस से अलग होकर उनके द्वारा बनाई गई पार्टी को बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है। उन्होंने इसे राजनीतिक पक्षपात और बदले की कार्रवाई बताया।
उन्होंने वोटों को लेकर भी कई आरोप लगाए। ममता ने दावा किया कि 92 लाख वोट हटाए गए और ईवीएम को हाईजैक करने के बावजूद अंतर केवल 32 लाख वोटों का रहा। उन्होंने कहा कि बीजेपी उनकी पार्टी को कभी खत्म नहीं कर सकती।
इन आरोपों को ममता बनर्जी ने अपनी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े व्यापक सवालों के साथ जोड़ा।
बिहार से बंगाल तक ‘वोट लूट’ का आरोपममता बनर्जी ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में वोट लूटे गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने ईवीएम को हाईजैक किए जाने का भी आरोप लगाया।
बीजेपी पर निशाना साधते हुए ममता ने उसे ‘झूठा बीजेपी पार्टी’ और ‘जुमला पार्टी’ कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का उद्देश्य देश में लोकतंत्र, संविधान और शिक्षा व्यवस्था को खत्म करना है।
ममता ने अपने बयान में पत्रकारों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों को भी नहीं बख्शा जा रहा है और बीजेपी के खिलाफ बोलने वालों को गिरफ्तार किया जाता है।
उद्धव ठाकरे का भी किया जिक्रममता बनर्जी ने महाराष्ट्र की राजनीति का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे के साथ हुए घटनाक्रम की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि इससे पहले उद्धव ठाकरे के साथ भी ऐसा ही हुआ था।
उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि उन्हें ऐसे किसी व्यक्ति का सम्मान नहीं है, जो केवल बीजेपी के अहंकार को संतुष्ट करने में लगा हुआ है।
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को दिए अलग नाम और सिंबलचुनाव आयोग के फैसले के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है। इससे पहले आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में दोनों पक्षों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ा फूल’ वाले पुराने चुनाव चिह्न का इस्तेमाल आगामी उपचुनाव में नहीं करने का निर्देश दिया था।
आयोग ने दोनों पक्षों से उपलब्ध चुनाव चिह्नों की सूची में से अपनी पसंद बताने को कहा था। इसके बाद दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न तय किए गए।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला दोनों गुटों के बीच चल रहे विवाद के निपटारे के बाद किया जाएगा।
इस फैसले के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बीजेपी पर राजनीतिक पक्षपात और बदले की कार्रवाई के आरोप लगाए हैं। वहीं, आयोग की मौजूदा व्यवस्था के तहत दोनों गुट आगामी उपचुनाव में अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे।