पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के भीतर असंतोष और नेताओं के संभावित पलायन को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चाएं भी हैं कि आने वाले समय में टीएमसी के कुछ प्रमुख चेहरे पार्टी से अलग राह चुन सकते हैं। इसी बीच राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने सामने आकर इन तमाम अटकलों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन चर्चाओं को संबोधित किया, जिनमें उनके और कुछ अन्य नेताओं के पार्टी छोड़ने की संभावना जताई जा रही थी। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि उन्हें यह पुष्टि करते हुए खुशी हो रही है कि उनके बारे में जो तमाम अनुमान लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सही हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और उन्होंने मिलकर अपने-अपने राजनीतिक रुख पर कायम रहने का निर्णय लिया है।
अपने संदेश में सुप्रियो ने कहा कि चूंकि वे तीनों पहले ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग हो चुके हैं, इसलिए यह कोई रहस्य नहीं है कि उनकी वापसी की संभावनाएं भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे मौजूदा परिस्थितियों से निराश जरूर हैं, मगर अपने फैसले पर अडिग हैं।
सांसद ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि वे और उनके सहयोगी कई मुद्दों को लेकर दुखी और हताश महसूस कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इस बात की संतुष्टि है कि उन्होंने उन लोगों की शंकाओं को सही साबित कर दिया जो लगातार उनके बारे में अनुमान लगा रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके मन में किसी के प्रति कोई शिकायत या नाराजगी नहीं है। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे सभी के प्रेम, समर्थन और समझदारी की सराहना करते हैं। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि यदि कोई उनके लिए कुछ अच्छा कर सकता है तो जरूर बताए, क्योंकि वे किसी सकारात्मक खबर का इंतजार कर रहे हैं।
जनादेश और विकास को बताया प्राथमिकताबाबुल सुप्रियो ने अपने बयान में लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के फैसले के सम्मान की भी बात की। उन्होंने कहा कि अतीत में कई बार राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद उन्होंने जनता द्वारा चुनी गई सरकारों के साथ मिलकर काम किया है। उनके अनुसार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विकास कार्यों और जनहित से जुड़े मुद्दों को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी दल या नेता के साथ वैचारिक असहमति हो सकती है, लेकिन इसका असर जनता के हितों पर नहीं पड़ना चाहिए। सरकारों और जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे लोगों के कल्याण और क्षेत्र के विकास के लिए मिलकर काम करें।
भ्रष्टाचार पर अपनाया सख्त रुखअपने पोस्ट में बाबुल सुप्रियो ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उनकी किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है और हर किसी को अपने राजनीतिक तथा व्यक्तिगत फैसले लेने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे उन लोगों का समर्थन नहीं कर सकते जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है, जनता के धन का दुरुपयोग किया है या प्रशासनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है।
सुप्रियो ने कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार में शामिल पाए गए हैं, उन्हें कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उनके मुताबिक ऐसे लोगों की सही जगह जेल है और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत उचित सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच एजेंसियां अपना काम निष्पक्षता से करेंगी और सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाकर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।