हरिद्वार में कांवड़ यात्रा ने बनाया नया रिकॉर्ड, 4.80 करोड़ से ज्यादा शिवभक्त पहुंचे; हजारों टन कचरा जमा

हरिद्वार में इस साल कांवड़ यात्रा ने पिछले चार दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 13 दिनों तक चले कांवड़ मेले में 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे और हरकी पैड़ी समेत अलग-अलग गंगा घाटों से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए। पिछले साल करीब 4 करोड़ 52 लाख कांवड़िए हरिद्वार आए थे। इस लिहाज से इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 28 लाख से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

शिवभक्तों की इस विशाल भीड़ का असर हरिद्वार की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ा। मेला क्षेत्र और गंगा घाटों पर बड़ी मात्रा में कचरा जमा हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न घाटों और कांवड़ क्षेत्र में करीब 7000 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ। नगर निगम की टीमें लगातार सफाई अभियान चला रही हैं और अब तक 5500 मीट्रिक टन से अधिक कचरा उठाया जा चुका है।

40 साल में पहली बार इतने कांवड़िए पहुंचे

कांवड़ मेले के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार दशकों में इस बार हरिद्वार पहुंचने वाले शिवभक्तों की संख्या सबसे अधिक रही। 1986 में करीब चार लाख कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे थे। इसके बाद संख्या लगातार बढ़ती गई और वर्ष 2000 में यह आंकड़ा एक करोड़ तक पहुंच गया।

साल 2018 में 3.76 करोड़, 2019 में करीब 3.50 करोड़ और 2022 में 3.80 करोड़ कांवड़ियों ने हरिद्वार से गंगाजल लिया। वर्ष 2023 में यह संख्या करीब 4 करोड़, 2024 में 4.14 करोड़ और 2025 में 4.52 करोड़ रही। अब 2026 में यह आंकड़ा 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार तक पहुंच गया है।
हर साल बढ़ती रही श्रद्धालुओं की संख्या

कांवड़ मेले के वर्षवार आंकड़े इस यात्रा में लगातार बढ़ती भीड़ को दर्शाते हैं।


1986 — 4 लाख
1990 — 10 लाख
1995 — 50 लाख
2000 — 1 करोड़
2018 — 3.76 करोड़
2019 — करीब 3.50 करोड़
2020-21 — मेला स्थगित
2022 — 3.80 करोड़
2023 — करीब 4 करोड़
2024 — 4.14 करोड़
2025 — 4.52 करोड़
2026 — 4.80 करोड़

इस साल देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी सहित विभिन्न घाटों से गंगाजल लिया और अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हुए। मंगलवार को कांवड़िए अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में गंगाजल से जलाभिषेक करने पहुंचे।

भारी भीड़ ने सफाई व्यवस्था के सामने रखी चुनौती

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी के कारण हरिद्वार की सड़कों, हाईवे और कांवड़ मार्गों पर लगातार दबाव बना रहा। अंतिम दो दिनों में भीड़ और वाहनों की संख्या इतनी अधिक रही कि नगर निगम के छोटे-बड़े सफाई वाहन कांवड़ मेला क्षेत्र में आसानी से प्रवेश नहीं कर सके। इसके कारण इन क्षेत्रों में कचरा जमा होता गया।

सोमवार देर रात भीड़ कम होने के बाद नगर निगम ने सफाई अभियान तेज किया। हरकी पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों और कांवड़ पटरी पर सफाई टीमों ने काम शुरू किया। नगर निगम आयुक्त नंदन कुमार के अनुसार, दो दिनों में करीब 1500 मीट्रिक टन कचरा उठाया गया।

30 जुलाई से लगातार चल रहा था सफाई अभियान

नगर निगम की टीमें कांवड़ यात्रा के शुरुआती दौर से ही गंगा घाटों, कांवड़ पटरी और मेला क्षेत्र में नियमित सफाई कर रही थीं। नगर आयुक्त नंदन कुमार ने बताया कि 30 जुलाई से 8 अगस्त के बीच करीब 5500 मीट्रिक टन कचरा नगर निगम की टीमों ने उठाया था। अंतिम दिनों में भीड़ बढ़ने के कारण सफाई कार्य प्रभावित हुआ, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या कम होने के बाद अभियान में तेजी लाई गई।

पुलिस-प्रशासन के सामने भी रही बड़ी चुनौती

कांवड़ियों की रिकॉर्ड संख्या के कारण हरिद्वार में भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रही। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण शहर की सड़कों और प्रमुख मार्गों पर लगातार दबाव बना रहा।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के मुताबिक, 13 दिनों के दौरान 4.80 करोड़ शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर रवाना हुए। उनके अनुसार, पूरे कांवड़ मेला क्षेत्र में पुलिस बल लगातार ड्यूटी पर तैनात रहा। पुलिस और प्रशासन की ओर से भीड़ तथा यातायात को संभालने के लिए व्यवस्थाएं की गई थीं।