सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई, जिससे आर्थिक चर्चा के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रुपये की कमजोरी को लेकर भाजपा पर करारा हमला बोला। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “गिरने के मामले में रुपये और बीजेपी की छवि के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है।”
अखिलेश यादव का केंद्र सरकार पर तंजसपा मुखिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा कि रुपये के लगातार गिरने के साथ-साथ भाजपा की साख और छवि भी नीचे जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके नेताओं के भ्रष्टाचार और कांडों के खुलासे लगातार हो रहे हैं, लेकिन किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। उनका कहना था, “बीजेपी में हमेशा से नैतिक दीवालियापन रहा है, और अब यह चरम पर पहुँच चुका है।”
संसद में सपा सांसदों ने उठाए गंभीर सवालरुपये के मुद्दे को लेकर सपा सांसद लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं। सोमवार को आजमगढ़ से सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने संसद में रुपये की गिरावट पर सवाल उठाया। उन्होंने वित्त मंत्री से पूछा कि प्रधानमंत्री के बयान के अनुसार रुपये की कमजोरी से देश की साख पर असर पड़ता है, तो क्या अभी भी यह मान्य है?
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी रुपये की लगातार कमजोरी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह विफल हो चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
रुपये में गिरावट की वजहें और केंद्रीय प्रयास
बता दें कि सोमवार को रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर लिया। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी प्रमुख वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रुपये को स्थिर रखने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन बाहरी दबाव के कारण अभी तक इस गिरावट को रोकने में सफलता नहीं मिल पाई है।
इस गिरावट ने न केवल आम निवेशकों और व्यापारियों को चिंता में डाल दिया है, बल्कि राजनीतिक विवाद का मुद्दा भी बन गया है। सपा नेताओं का आरोप है कि सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, जिसके चलते रुपये की कीमत लगातार कमजोर हो रही है।