राम मंदिर दान चोरी का असली मास्टरमाइंड कौन? अविनाश शुक्ला के खुलासों के बाद अब इन 5 पर शिकंजा

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच लगातार नए खुलासों के साथ आगे बढ़ रही है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला से हुई पूछताछ के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में अविनाश ने ऐसे कई तथ्यों का खुलासा किया है, जिनसे जांच की दिशा और व्यापक हो गई है। अब उसके बयान के आधार पर पुलिस अन्य आरोपियों से भी विस्तृत पूछताछ की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि अविनाश के खुलासों के बाद कुछ और व्यक्तियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। जैसे ही पर्याप्त साक्ष्य जुटेंगे, जांच एजेंसी इस मामले में कुछ नए लोगों को भी आरोपी बना सकती है। इसी कड़ी में पुलिस जेल में बंद पांच अन्य आरोपियों से पूछताछ करने की योजना बना रही है।

जांच अधिकारियों की प्राथमिकता अब यह जानना है कि पूरे चढ़ावा चोरी नेटवर्क का संचालन आखिर किसके इशारे पर होता था। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि मंदिर से नकदी और अन्य चढ़ावे को किस तरीके से बाहर निकाला जाता था, यह सिलसिला कब शुरू हुआ और इसमें किस-किस की क्या जिम्मेदारी थी। पुलिस उपाधीक्षक एवं विवेचक आशुतोष तिवारी की ओर से दायर प्रार्थनापत्र पर अदालत ने जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ की अनुमति प्रदान कर दी है। इससे पहले पुलिस ने अविनाश शुक्ला से जिला जेल में पूछताछ की थी और बाद में उसे पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर भी गहन पूछताछ की गई। सूत्रों का दावा है कि इस दौरान उसने कई नए नामों का उल्लेख किया, विभिन्न आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं की जानकारी दी और कुछ करीबी लोगों के बारे में भी पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई। यह भी कहा जा रहा है कि परिक्रमा मार्ग पर चोरी की रकम के बंटवारे की पूरी प्रक्रिया उसकी निगरानी में संचालित होती थी।
चढ़ावे की रकम कैसे बांटी जाती थी?

सूत्रों के मुताबिक, अविनाश शुक्ला से हुई पूछताछ में चढ़ावे की कथित बंदरबांट के तरीके को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि चोरी की गई रकम का वितरण एक तय व्यवस्था के तहत किया जाता था और इसकी कमान अविनाश के हाथ में थी। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ ऐसे लोगों तक भी इस रकम का हिस्सा पहुंचता था, जो अब तक स्वयं को पूरी तरह निर्दोष बताते रहे हैं और आरोपों को निराधार करार देते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान अविनाश ने यह भी बताया कि गणनाकर्मियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत होती थी और इसमें तीर्थ क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली पदाधिकारियों की सिफारिश महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। आरोप है कि संरक्षण मिलने के कारण संबंधित लोगों को भी कथित तौर पर चढ़ावे की रकम से हिस्सा दिया जाता था। फिलहाल पुलिस अविनाश की निशानदेही पर बहुमूल्य सामान और संदिग्ध संपत्तियों की जांच में जुटी हुई है। इसी सिलसिले में शनिवार को भी कई स्थानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की गई।

पांच आरोपियों से होगी पूछताछ, फिर मांगी जा सकती है कस्टडी रिमांड

इस मामले में अविनाश शुक्ला के अलावा रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा भी न्यायिक हिरासत में हैं। इनमें से पांच आरोपियों से पूछताछ की अनुमति पुलिस ने अदालत से मांगी है। जांच एजेंसी इनसे घोषित और अघोषित संपत्तियों के संबंध में विस्तृत जानकारी हासिल करना चाहती है। पुलिस यह भी जांच रही है कि मंदिर में नौकरी के दौरान या उसके बाद यदि किसी आरोपी ने अचानक संपत्ति अर्जित की है तो उसके लिए धन का स्रोत क्या था। यदि संपत्ति का वैध स्रोत नहीं मिल पाया तो जांच इस दिशा में आगे बढ़ेगी कि कहीं वह चढ़ावे की कथित हेराफेरी से अर्जित धन से तो नहीं खरीदी गई। अधिकारियों का मानना है कि इन पांचों से पूछताछ के दौरान जो नए तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग भी अदालत से की जा सकती है।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में


राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस बैंक कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता की भी गहराई से जांच कर रही है। इसी क्रम में शनिवार को पुलिस के निर्देश पर एसबीआई के शाखा प्रबंधक अनूप कुमार त्रिपाठी क्षेत्राधिकारी कार्यालय पहुंचे, जहां उनका बयान दर्ज किया गया। जानकारी के अनुसार, बैंक की उस शाखा में पहले तैनात रहे अधिकारियों से भी जल्द पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा मंदिर से जुड़े कार्यों में शामिल रहे सभी बैंक कर्मचारियों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। पुलिस अब तक वर्तमान में कार्यरत सभी नौ कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि फिलहाल ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर व्यवस्था में लापरवाही के आरोप जरूर लगाए जा रहे हैं, लेकिन उनके चोरी में सीधे शामिल होने के अब तक ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं। हालांकि पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।