अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और हेराफेरी के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब तक जहां इस मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और ट्रस्ट से जुड़े दो लोगों के इस्तीफे की खबरें भी सामने आई हैं, वहीं सबसे बड़ा सवाल अब भी वही बना हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन है। सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें बैंक स्टाफ की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जो दान की रकम को ट्रस्ट से बैंक तक ले जाने की प्रक्रिया में शामिल थे।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवालमिली जानकारी के मुताबिक, जांच में यह संकेत मिले हैं कि कुछ बैंक कर्मचारियों की भी इस कथित हेराफेरी में संलिप्तता रही है। ये वही कर्मचारी थे, जिनकी जिम्मेदारी ट्रस्ट कार्यालय से दान की रकम लेकर बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की थी। बताया जा रहा है कि नोटों के बंडल जब बक्सों में रखे जाते थे, उसी दौरान कथित रूप से पैसों की हेराफेरी की जाती थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इस चोरी का हिसाब-किताब ट्रस्ट परिसर में नहीं, बल्कि बैंक परिसर के भीतर ही किया जाता था।
ट्रस्ट दफ्तर से बैंक तक इस तरह पहुंचता था दानराम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती प्रतिदिन दो शिफ्टों में की जाती थी—दोपहर 2 बजे और रात 8 बजे। इस कार्य में करीब 40 कर्मचारी लगाए जाते थे। पहले चरण में ट्रस्ट के भरोसेमंद लोगों की निगरानी में दान की गिनती होती थी, इसके बाद बैंक कर्मियों, आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारियों, इंटरनल ऑडिट टीम और ट्रस्ट सदस्यों की मौजूदगी में रकम को बैंक तक भेजा जाता था। अब जांच में यह भी सामने आ रहा है कि इसी पूरी प्रक्रिया के दौरान बैंक कर्मियों द्वारा भी कथित रूप से दान की रकम में गड़बड़ी की जाती थी।
8 गिरफ्तार, जांच में तेज हुआ शिकंजाइस पूरे मामले ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोर दिया है, जहां भक्त पूरी आस्था के साथ श्रीराम को चढ़ावा अर्पित करते थे, वहीं आरोप है कि उसी धन में गड़बड़ी कर उसे निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी स्पष्ट कहा है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
अब तक इस मामले में चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव समेत कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी आरोपियों को CJM कोर्ट ने 3 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इनमें से 6 लोग मंदिर में दानपात्र की गिनती और नकदी प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी बताए जा रहे हैं, जिन पर लंबे समय से गड़बड़ी करने के आरोप हैं। जांच में सीसीटीवी फुटेज के जरिए भी संदिग्ध गतिविधियों के प्रमाण मिलने की बात सामने आई है।