राम मंदिर चढ़ावा मामला अब CBI को सौंपने की तैयारी, बढ़ेगा जांच का दायरा

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े कथित गबन और चोरी के मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच लगातार नए आयाम ले रही है। अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के फोकस में आ गई है। आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या में चल रही जांच पर केंद्रीय एजेंसियां भी लगातार नजर बनाए हुए हैं और आवश्यक सूचनाएं एकत्र कर रही हैं। इसी बीच एसआईटी (SIT) को जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा जा सकता है, जिससे जांच का दायरा और व्यापक हो जाएगा।

राम मंदिर और अयोध्या भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में लंबे समय से शामिल रहे हैं। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जोड़ते हुए सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। साथ ही ट्रस्ट से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी गहन पड़ताल किए जाने की मांग की जा रही है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि यदि जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही पुलिस की अब तक की कार्रवाई और जांच की दिशा पर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरुआत से ही इस मामले में सख्त रुख अपनाने का दावा किया है। आठ नामजद आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी के जरिए सरकार ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। यह टीम अब चढ़ावे की राशि की गिनती से लेकर उसे बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया, निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), उससे जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की प्रत्येक कड़ी की विस्तार से जांच कर रही है।

जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही हैं और अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर कई नए पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के दो अधिकारियों और ट्रस्ट से जुड़े एक प्रमुख सदस्य की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं चढ़ावे के प्रबंधन और बैंकिंग प्रक्रिया में किसी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही तो नहीं हुई थी। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का भी परीक्षण किया जा रहा है।

इस मामले में दर्ज एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल की गई हैं, जिससे जांच का दायरा पहले की तुलना में और व्यापक हो गया है। चूंकि मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा है और जांच में बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता के संकेत भी सामने आ रहे हैं, इसलिए पुलिस अब वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहराई से समीक्षा कर रही है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और महत्वपूर्ण नाम भी सामने आ सकते हैं। इसी के साथ यह चर्चा भी तेज हो गई है कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए इसे सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) को सौंपा जा सकता है।

उधर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। बैंक प्रबंधन ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की आंतरिक जांच शुरू कर दी है, जो उस अवधि के दौरान अयोध्या में तैनात थे। वरिष्ठ अधिकारियों को यह जांच करने का निर्देश दिया गया है कि कहीं बैंक की प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की चूक, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। बैंक प्रबंधन का कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होती है, तो उसके खिलाफ बैंकिंग नियमों के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पूरे मामले पर जांच एजेंसियों, राज्य सरकार और बैंक प्रशासन की नजर बनी हुई है। एसआईटी की विस्तारित जांच, संभावित सीबीआई जांच और बैंक की आंतरिक पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित चढ़ावा अनियमितता में किस स्तर तक जिम्मेदारियां तय होती हैं और किन लोगों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर लगातार नजर रखी जा रही है।