अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने रविवार को लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान टीम ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी। पिछले छह दिनों से लगातार चल रही जांच के दौरान SIT ने लगभग 60 घंटे से अधिक समय तक दस्तावेजों, प्रक्रियाओं और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की। जांच एजेंसी ने अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की है। ऐसे में पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे से जुड़े इस संवेदनशील मामले में जांच टीम को क्या अहम तथ्य मिले हैं और आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है।
दान प्रबंधन व्यवस्था में कई खामियों की ओर इशाराप्रारंभिक जांच के दौरान SIT ने दान और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रिया में कई गंभीर कमियों का उल्लेख किया है। जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा दान पात्रों में डाले गए नकद रुपये, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं को दान पेटियों से निकालने, उन्हें काउंटिंग सेंटर तक पहुंचाने और वहां उनकी गणना करने की पूरी व्यवस्था में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है। सूत्रों के अनुसार टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
जांच एजेंसी ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई है कि चढ़ावे की राशि को बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस डबल लॉक प्रणाली के तहत नकदी को सुरक्षित रखा जाना चाहिए, उसका पालन पूरी तरह नहीं हो रहा है। नियमों के मुताबिक दो अलग-अलग चाबियां अलग-अलग जिम्मेदार व्यक्तियों के पास होनी चाहिए, लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं पाया गया।
15 दिनों में तैयार होगी विस्तृत जांच रिपोर्टSIT द्वारा प्रस्तुत की गई यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है। जांच टीम ने अभी तक अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट के किसी शीर्ष पदाधिकारी का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया है। हालांकि, रिपोर्ट में उन कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं जो नकदी की गिनती और प्रबंधन प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। इसमें ट्रस्ट के कुछ कर्मचारी, बैंक से जुड़े कार्मिक और नकदी गिनने वाली निजी एजेंसी के कुछ कर्मियों की भूमिका का भी जिक्र किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ SIT की बैठक अधिक समय तक नहीं चल सकी क्योंकि मुख्यमंत्री का पहले से निर्धारित कार्यक्रम था और उन्हें राज्यपाल से मुलाकात के लिए जाना था। फिलहाल जांच का शुरुआती खाका सरकार को सौंप दिया गया है, जबकि पूरी और विस्तृत रिपोर्ट अगले 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।
चढ़ावा विवाद के बाद दान राशि में दर्ज की गई गिरावटराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच भी इस विषय को लेकर चर्चा बढ़ गई है। कई भक्त अब यह जानना चाहते हैं कि उनकी आस्था के प्रतीक स्वरूप दिया गया दान किस प्रकार सुरक्षित रखा जाता है और उसका उपयोग किस व्यवस्था के तहत किया जाता है। यही कारण माना जा रहा है कि बीते कुछ दिनों में दान राशि में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है।
जानकारी के अनुसार सामान्य दिनों में मंदिर की दान पेटियों से प्रतिदिन लगभग 8 लाख से 12 लाख रुपये तक की राशि प्राप्त होती थी। लेकिन पिछले पांच दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दान पेटियों से केवल 85 हजार से 95 हजार रुपये प्रतिदिन के बीच ही राशि निकल रही है। यह अंतर मंदिर प्रशासन और जांच एजेंसियों दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
दर्शनार्थियों की संख्या पर नहीं पड़ा कोई असरहालांकि दान राशि में आई कमी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में किसी प्रकार की कमी दिखाई नहीं दे रही है। राम मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों की संख्या पहले की तरह बनी हुई है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान राम के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी हैं।
माना जा रहा है कि भक्तों का विश्वास भगवान राम के प्रति पहले जैसा ही मजबूत है, लेकिन मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ सवाल जरूर उठे हैं। यही वजह है कि अब चढ़ावे की गिनती पहले की तुलना में अधिक सतर्कता और निगरानी के बीच कराई जा रही है। वर्तमान में भी दान राशि की गणना ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा की देखरेख में ही संपन्न कराई जा रही है।
राम मंदिर में कैसे होती है चढ़ावे की गणना?राम मंदिर परिसर में कुल 35 दान पेटियां स्थापित हैं, जिनमें श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार नकद राशि और अन्य भेंट अर्पित करते हैं। इन दान पेटियों को प्रतिदिन दो बार खोला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्रस्ट और बैंक के कुल चार अधिकृत कर्मचारी मौजूद रहते हैं ताकि कार्यवाही रिकॉर्ड के अनुसार पूरी की जा सके।
चढ़ावे की गिनती दो अलग-अलग शिफ्टों में आयोजित की जाती है। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चलती है, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक संचालित होती है। प्रत्येक शिफ्ट में लगभग 20 कर्मचारी नकदी और अन्य वस्तुओं की गणना में जुटे रहते हैं। यही व्यवस्था लंबे समय से लागू है।
कथित चोरी मामले में कई लोगों पर कार्रवाई की संभावनाराम मंदिर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित यात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में चढ़ावे की राशि की गिनती की जाती है। इसी परिसर में वह काउंटिंग रूम मौजूद है जहां नकदी का हिसाब-किताब तैयार किया जाता है। गिनती कक्ष के पास ही ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का कार्यालय भी स्थित है। SIT ने जांच के दौरान अनिल मिश्रा से भी विस्तृत पूछताछ की है और कई बिंदुओं पर उनका पक्ष दर्ज किया है।
अब तक की जांच में SIT ने करीब 150 लोगों से पूछताछ की है। सूत्रों का कहना है कि इनमें से लगभग 25 ऐसे लोग चिन्हित किए गए हैं जिनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है और जिनके खिलाफ आगे कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल एहतियात के तौर पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों के जिला छोड़ने पर रोक लगाई गई है। वहीं जिन कर्मचारियों के नाम कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण में सामने आए हैं, उन्हें भी जांच पूरी होने तक अयोध्या से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।