भक्तों की आस्था और पर्यावरण के लिए बड़ा फैसला, काशी मंदिर में अब इस चीज के इस्तेमाल पर लगी पाबंदी

वाराणसी के प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में अब से प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह फैसला रविवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की अहम बैठक में लिया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी गंभीरता से ध्यान में रखा गया। इस बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि मंदिर परिसर को प्लास्टिक मुक्त किया जाएगा, जिससे न केवल परिसर की पवित्रता बनी रहेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बेहतर वातावरण सहेजा जा सकेगा।

सावन से पहले मंदिर प्रशासन हुआ सक्रिय

काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन महीने की तैयारियां जोरों पर हैं। 11 जुलाई से शुरू हो रहे सावन के दौरान लाखों की संख्या में भक्त बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए आते हैं। इस भारी भीड़ को देखते हुए रविवार को मंदिर प्रशासन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह फैसला लिया गया कि इस बार सावन से ही बाबा विश्वनाथ के दरबार को प्लास्टिक से मुक्त करने की विशेष मुहिम शुरू की जाएगी, ताकि भक्तों को एक स्वच्छ और पावन वातावरण मिल सके।

पर्यावरण के लिए उठाया गया कदम, श्रद्धा के साथ जागरूकता भी ज़रूरी

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि दिसंबर 2024 में मंदिर न्यास परिषद की तरफ से परिसर में प्लास्टिक पर प्रतिबंध का प्रस्ताव पास किया गया था। अब इस पर गंभीरता से अमल करते हुए जुलाई से व्यापक स्तर पर काम शुरू किया जाएगा। सावन माह में अलग-अलग कैंपेन चलाकर भक्तों को जागरूक किया जाएगा कि वे मंदिर परिसर में प्लास्टिक लेकर प्रवेश न करें। 10 अगस्त 2025 से यह नियम पूरी तरह से लागू हो जाएगा।

भक्तों से अपील: परंपरा निभाएं, प्लास्टिक नहीं लाएं

मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अब श्रद्धालुओं को फल, फूल या पूजन सामग्री प्लास्टिक थैलियों या डिब्बों में लेकर मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी। दूध, जल, माला जैसी चीज़ों के लिए भक्तों को वैकल्पिक साधनों का उपयोग करना होगा। प्रशासन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सोशल मीडिया के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह संदेश पहुंचे और वे नियमों का पालन करते हुए बाबा के दरबार में श्रद्धा के साथ साथ स्वच्छता का भी ध्यान रखें।

मंदिर परिसर में पूरी तरह से प्लास्टिक पर लगेगी लगाम

गौरतलब है कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है, और अब मंदिर प्रशासन के इस नए निर्णय के बाद संपूर्ण परिसर को प्लास्टिक मुक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है। यह न सिर्फ एक मंदिर परिसर के लिए अहम कदम है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि आस्था और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। इससे न केवल मंदिर की दिव्यता बरकरार रहेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित होगा।