लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब केवल हादसे की वजह ही नहीं, बल्कि उस भवन से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में आ गई हैं। जिस इमारत में सोमवार को यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसके खिलाफ करीब दस वर्ष पहले अवैध निर्माण के आरोपों के चलते ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई थी। हैरानी की बात यह है कि भवन को गिराने का आदेश जारी होने के कुछ ही समय बाद उसे निरस्त भी कर दिया गया था। ऐसे में अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की कार्यप्रणाली और उस समय लिए गए फैसलों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
1980 में हुआ था भवन का आवंटनअलीगंज योजना के सेक्टर-डी में स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का इतिहास चार दशक से अधिक पुराना है। आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, 11 जुलाई 1980 को यह संपत्ति लॉटरी प्रणाली के माध्यम से रामेश्वर सहाय के पुत्र विजय कुमार को किराया-क्रय योजना के अंतर्गत आवंटित की गई थी। इसके बाद 4 नवंबर 1980 को दोनों पक्षों के बीच औपचारिक अनुबंध पूरा हुआ और भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया।
समय के साथ इस संपत्ति का स्वामित्व भी बदला। वर्ष 2005 में विक्रय विलेख के माध्यम से भवन विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के संयुक्त नाम पर दर्ज हुआ। बाद में 19 जनवरी 2013 को दोनों ने यह संपत्ति वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दी। इसके बाद 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने भवन का नामांतरण नए स्वामियों के पक्ष में कर दिया। लगभग 1992 वर्गफुट क्षेत्रफल वाले इस भवन का नक्शा 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।
अवैध निर्माण पर हुई थी कार्रवाईदस्तावेजों के अनुसार, भवन में बाद के वर्षों में अनधिकृत निर्माण किए जाने की शिकायतें सामने आईं। मामला संज्ञान में आने के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज किया। जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 10 मई 2016 को संबंधित प्राधिकारी ने अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस भवन को अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था, उसी आदेश को महज दो महीने के भीतर वापस क्यों ले लिया गया। रिकॉर्ड बताते हैं कि 5 जुलाई 2016 को ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त कर दिया गया था। अब इस निर्णय के पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पांच वरिष्ठ अधिकारियों की टीम करेगी जांचहादसे के बाद सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा की अध्यक्षता में गठित जांच समिति में केके गौतम, एलडीए के मुख्य अभियंता मानवेंद्र सिंह, विद्युत विभाग के प्रमुख मनोज सागर तथा ओएसडी रविनंदन सिंह को शामिल किया गया है। यह समिति भवन के निर्माण, सुरक्षा मानकों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संभावित लापरवाही समेत सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रारंभिक स्तर पर कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। एलडीए के सहायक अभियंता (AE) अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर (JE) प्रमोद पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा कमलेन्द्र कुमार सिंह, एफएसएसओ इंदिरा नगर और गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता (कलेक्शन) जानकीपुरम को भी सस्पेंड किया गया है। सरकार का कहना है कि जांच में जो भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री सुरेश खन्ना ने जताया शोकराज्य सरकार की ओर से मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे संबंधित व्यक्ति किसी भी पद पर क्यों न हो, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जाएगी और तथ्यों के आधार पर दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सभी 15 लोगों की मृत्यु धुएं के कारण हुई।
कानपुर के दो युवकों की भी गई जानइस भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। हादसे में जान गंवाने वालों में कानपुर निवासी दो युवा भी शामिल हैं। दोनों युवक उस भवन में संचालित एक एनिमेशन फर्म में थ्री-डी आर्टिस्ट के रूप में कार्यरत थे। एक ही संस्थान में काम करने के कारण दोनों के बीच गहरी मित्रता थी और वे लंबे समय से साथ काम कर रहे थे।
जैसे ही घटना की सूचना उनके परिजनों तक पहुंची, परिवारों में मातम छा गया। अचानक आई इस दुखद खबर ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया। दोनों युवकों के परिवार तत्काल लखनऊ के लिए रवाना हो गए, जहां अंतिम औपचारिकताओं और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है। इस हादसे ने न केवल दो परिवारों के सपनों को तोड़ा है, बल्कि पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है।