खामेनेई की मौत पर लखनऊ में उबाल, मौलाना कल्बे जवाद बोले– 'ट्रंप और नेतन्याहू ने खुद अपने डेथ वारंट पर साइन किया'

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के निधन की खबर सामने आते ही देश-विदेश में प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया है। लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि खामेनेई की मौत किसी प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले का परिणाम है। उनके मुताबिक यह घटना पूरी उम्मत के लिए गहरा सदमा है।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि इस्लाम में शहादत का दर्जा सबसे ऊंचा माना जाता है और हर सच्चा मोमिन यह दुआ करता है कि उसे शहादत नसीब हो। उन्होंने दावा किया कि आयतुल्लाह खामेनेई स्वयं भी शहादत की इच्छा व्यक्त किया करते थे। मौलाना के शब्दों में, “जो व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है, वह मौत से नहीं डरता।”

बंकर में छिपने की खबरों को बताया मनगढ़ंत

मीडिया में आई उन रिपोर्ट्स को भी उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि खामेनेई हमले के डर से किसी बंकर में शरण लिए हुए थे। एएनआई को दिए बयान में मौलाना ने कहा कि खामेनेई अपने घर पर सामान्य दिनचर्या में व्यस्त थे। वे नियमित रूप से अपने दफ्तर आते-जाते और लोगों से मुलाकात करते थे। इसी दौरान उन पर हमला किया गया, जिसमें उनके साथ कई अन्य उलेमा के भी मारे जाने की बात कही गई।

उनका कहना था कि इस तरह की अफवाहें फैलाकर सच्चाई को छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है, जब भी कोई आवाज जुल्म के खिलाफ बुलंद होती है, उसे दबाने का प्रयास किया जाता है।
ट्रंप और नेतन्याहू पर सीधा हमला

मौलाना कल्बे जवाद ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने इस हमले के जरिए अपने “डेथ वारंट” पर खुद हस्ताक्षर कर दिए हैं। मौलाना ने कहा कि शहीद का खून कभी जाया नहीं जाता, बल्कि वही बदलाव और क्रांति की नींव बनता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अन्याय का परिणाम अंततः अन्याय करने वालों को ही भुगतना पड़ता है। उनके मुताबिक, दुनिया ने कई बार देखा है कि जुल्म करने वाली ताकतें ज्यादा समय तक कायम नहीं रह पातीं।

तीन दिन का मातम, कैंडल मार्च का आयोजन

घटना के विरोध में मौलाना ने तीन दिन के शोक की घोषणा की। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपील की कि वे स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखें और शांति बनाए रखें। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी पर दबाव डालने की इजाजत नहीं है।

मौलाना ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि इंसानियत का नुकसान है, क्योंकि खामेनेई वैश्विक स्तर पर फिलिस्तीन और अन्य उत्पीड़ित लोगों के समर्थन में आवाज उठाते थे। उन्होंने जानकारी दी कि रात में कैंडल मार्च निकाला जाएगा और देश के विभिन्न हिस्सों में शोक सभाएं आयोजित की जाएंगी।

सड़कों पर उतरे लोग, नारेबाजी तेज

खबर फैलते ही लखनऊ में शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकल आए। छोटे इमामबाड़े के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई, जहां लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए। माहौल गमगीन होने के साथ-साथ आक्रोश से भी भरा नजर आया।