सपा सांसद डिंपल यादव के खिलाफ मौलाना साजिद रशीदी द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान ने सियासी हलकों में तूफान ला दिया है। इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी भी खासा आक्रोशित नजर आई। सोमवार को एनडीए से जुड़े सांसदों ने संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें न केवल मौलाना की निंदा की गई, बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर भी अप्रत्यक्ष हमला बोला गया।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों के हाथों में जो पोस्टर थे, उन पर लिखा गया था— नारी सम्मान पर भारी, तुष्टिकरण की राजनीति तुम्हारी। इस नारों के जरिए विपक्ष पर महिला सम्मान के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डिंपल यादव ने संयमित प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को महिलाओं के सम्मान की इतनी ही चिंता थी, तो मणिपुर में महिलाओं के साथ हुए गंभीर अत्याचारों पर भी इसी तरह मुखरता दिखाई जाती। डिंपल का कहना था कि मौजूदा विरोध तब और सार्थक होता, अगर वह मणिपुर में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ भी उतने ही ज़ोर से उठाया गया होता।
गौरतलब है कि भाजपा की नेता बांसुरी स्वराज और कांग्रेस की रेणुका चौधरी ने भी मौलाना के बयान की निंदा करते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी थीं। इस मुद्दे को राजनीतिक मोड़ देते हुए एनडीए सांसदों ने प्रदर्शन में भाग लेकर सपा नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश की कि वे भी खुलकर इस बयान की आलोचना करें। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस मसले को मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे से जोड़कर समाजवादी पार्टी को कठघरे में खड़ा करना चाहती है।
डिंपल यादव ने अपने बयान में कहा, “अच्छा होता यदि मणिपुर की घटनाओं को लेकर भी इसी तरह की एकजुटता दिखाई जाती। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सभी दल जिस तरह एकमत दिखे, वैसा ही मणिपुर के मुद्दे पर भी दिखते तो देश में एक सकारात्मक संदेश जाता।”
समाजवादी पार्टी की राजनीतिक स्थिति की बात करें तो उसका पारंपरिक वोट बैंक मुस्लिम और यादव मतदाता माने जाते हैं। ऐसे में मौलाना की ओर से डिंपल यादव के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी ने पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया है। सपा न तो खुलकर बयान की निंदा कर पा रही है और न ही उसे नजरअंदाज कर पा रही है। यह स्थिति उसके लिए दोधारी तलवार जैसी बन गई है। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे विपक्ष को सपा की नीयत पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।
डिंपल यादव का अपमान और सपा की चुप्पी इस बात का संकेत हो सकते हैं कि पार्टी एक तरफ अपने वोटबैंक को नाराज़ नहीं करना चाहती, वहीं दूसरी ओर महिला सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी कोई ठोस स्टैंड लेने में झिझक रही है।